Last updated: May 15th, 2026 at 03:58 pm

बिहार का कुख्यात अपराधी “गोल्डन थीफ” एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। देश के कई राज्यों में हुई बड़ी ज्वेलरी लूट और चोरी की घटनाओं के पीछे जिस मास्टरमाइंड का नाम सामने आ रहा है, वह बिहार का ही रहने वाला बताया जा रहा है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी जेल में बंद होने के बावजूद अपने पूरे गैंग को वहीं से ऑपरेट कर रहा था। इस मामले ने पुलिस प्रशासन और जेल सुरक्षा व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपी का असली नाम सुबोध सिंह है, लेकिन अपराध की दुनिया में वह “गोल्डन थीफ” के नाम से मशहूर हो चुका है। उसका नेटवर्क केवल बिहार तक सीमित नहीं था, बल्कि तेलंगाना, झारखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और अन्य कई राज्यों तक फैला हुआ था। बताया जा रहा है कि उसका गैंग खासतौर पर ज्वेलरी दुकानों और सोने के कारोबारियों को निशाना बनाता था।
हाल ही में तेलंगाना में हुई करोड़ों रुपये की ज्वेलरी चोरी के बाद पुलिस को कई अहम सुराग मिले। जांच एजेंसियों ने जब मामले की गहराई से जांच शुरू की, तब यह खुलासा हुआ कि पूरी साजिश बिहार की जेल से रची जा रही थी। पुलिस के अनुसार आरोपी मोबाइल फोन और कुछ जेल कर्मचारियों की मदद से अपने साथियों तक निर्देश पहुंचाता था। इसी आधार पर पुलिस अब जेल के अंदर मौजूद नेटवर्क की भी जांच कर रही है।
सूत्रों के अनुसार गैंग बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम करता था। पहले रेकी की जाती थी, फिर टारगेट तय किया जाता था और उसके बाद चोरी या लूट की वारदात को अंजाम दिया जाता था। कई मामलों में आरोपी आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल करते थे ताकि पुलिस को भ्रमित किया जा सके। पुलिस का कहना है कि गैंग के सदस्य अलग-अलग राज्यों में फर्जी पहचान के साथ रहते थे।
इस मामले के सामने आने के बाद कई राज्यों की पुलिस ने संयुक्त जांच शुरू कर दी है। बिहार, तेलंगाना और दिल्ली पुलिस लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं। कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की जा रही है।
जेल से अपराध संचालन का मामला सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने बिहार सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का कहना है कि यदि जेल के अंदर से इतने बड़े अपराधी अपना नेटवर्क चला रहे हैं, तो यह कानून व्यवस्था की बड़ी विफलता है। वहीं सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जेल सुरक्षा को और मजबूत बनाया जाएगा।
अपराध विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में अपराधियों ने तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। जेल में मोबाइल पहुंचना और बाहरी दुनिया से संपर्क बनाए रखना पुलिस और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे मामलों में केवल गिरफ्तारी काफी नहीं होती, बल्कि पूरे नेटवर्क को खत्म करना जरूरी होता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे अपराधियों के कारण बिहार की छवि प्रभावित होती है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का दावा है कि संगठित अपराध के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है और जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा कर दिया जाएगा।
फिलहाल इस मामले की जांच तेजी से जारी है और सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर जेल के अंदर से इतने बड़े स्तर पर अपराध संचालन कैसे संभव हुआ। आने वाले दिनों में इस केस में कई और बड़े नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
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