Last updated: May 15th, 2026 at 03:51 pm

दिल्ली में आयोजित BRICS देशों की अहम बैठक इस बार कई कारणों से चर्चा में रही। बैठक के बाद सदस्य देशों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी, जिसके चलते संयुक्त बयान जारी नहीं किया जा सका। इसके बाद भारत की ओर से चेयर स्टेटमेंट जारी कर बैठक में हुई चर्चाओं और अपनी स्थिति को स्पष्ट किया गया। अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकार इस घटनाक्रम को वैश्विक स्तर पर बढ़ते राजनीतिक और रणनीतिक मतभेदों का संकेत मान रहे हैं।
BRICS समूह में भारत, ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। पिछले कुछ वर्षों में यह संगठन वैश्विक राजनीति और आर्थिक मामलों में एक प्रभावशाली समूह के रूप में उभरा है। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल ये देश कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मिलकर अपनी रणनीति तैयार करने की कोशिश करते हैं। हालांकि इस बार की बैठक में सदस्य देशों के अलग-अलग हित खुलकर सामने आए।
सूत्रों के मुताबिक बैठक में पश्चिम एशिया की स्थिति, ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक व्यापार व्यवस्था और क्षेत्रीय संघर्ष जैसे मुद्दों पर लंबी चर्चा हुई। खास तौर पर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात से जुड़े मामलों पर कुछ देशों के बीच मतभेद देखने को मिले। बताया जा रहा है कि इन विषयों पर सहमति नहीं बनने के कारण संयुक्त बयान तैयार नहीं हो पाया।
भारत ने बैठक के बाद जारी अपने चेयर स्टेटमेंट में कहा कि सभी अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीतिक माध्यमों से होना चाहिए। भारत ने वैश्विक शांति, स्थिरता और सभी देशों की संप्रभुता का समर्थन करते हुए सहयोग और संतुलन पर जोर दिया। भारत का कहना है कि वर्तमान समय में दुनिया को संघर्ष नहीं बल्कि साझेदारी और संवाद की जरूरत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय संगठनों की बैठकों में भी साफ दिखाई देने लगा है। कई देशों के अपने राजनीतिक और आर्थिक हित हैं, जिसके कारण वैश्विक मंचों पर एकजुट राय बनाना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भारत इस पूरे मामले में संतुलित भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। भारत एक तरफ रूस के साथ अपने संबंध बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर पश्चिमी देशों और खाड़ी देशों के साथ भी मजबूत साझेदारी पर जोर दे रहा है। इसी वजह से भारत की विदेश नीति को “संतुलित कूटनीति” के रूप में देखा जा रहा है।
बैठक में चीन और रूस की भूमिका पर भी अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नजर रही। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS समूह के भीतर चीन का बढ़ता प्रभाव अन्य सदस्य देशों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। वहीं रूस लगातार वैश्विक मंचों पर अपने समर्थन को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि संयुक्त बयान जारी नहीं हो सका, लेकिन भारत ने इसे BRICS की विफलता मानने से इनकार किया है। सरकार का कहना है कि अलग-अलग विचार लोकतांत्रिक और बहुपक्षीय संगठनों का हिस्सा होते हैं। भारत ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में सदस्य देशों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा और वैश्विक मुद्दों पर साझा रणनीति तैयार की जा सकेगी।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों के अनुसार आने वाले वर्षों में BRICS की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो सकती है, खासकर तब जब दुनिया में नए आर्थिक और राजनीतिक गठजोड़ बन रहे हैं। ऐसे में भारत की भूमिका इस समूह के भीतर काफी अहम मानी जा रही है।
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