Last updated: August 12th, 2026 at 12:49 pm

बिहार के मंत्री नितिन मिश्रा ने झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने कांग्रेस पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया कि अलग-अलग राज्यों में छात्र आंदोलनों को लेकर पार्टी का रुख एक जैसा क्यों नहीं रहता।
मंत्री का बयान ऐसे समय आया है जब झारखंड में छात्र संगठन विभिन्न मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान छात्रों और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति भी बनी है।
नितिन मिश्रा ने कांग्रेस नेतृत्व पर आरोप लगाया कि जब किसी भाजपा शासित राज्य में छात्र या युवा प्रदर्शन करते हैं तो कांग्रेस उनके मुद्दों को लेकर मुखर हो जाती है, लेकिन जहां उसकी सहयोगी या विपक्षी दलों की सरकार होती है, वहां उसका रवैया अलग दिखाई देता है।
उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं से इस कथित अंतर को स्पष्ट करने की मांग की।
बिहार की राजनीति में यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में चुनावी माहौल और राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हैं। बिहार में BJP और उसके सहयोगी दल एक तरफ हैं, जबकि RJD और कांग्रेस समेत विपक्षी दल दूसरी तरफ सरकार और NDA पर लगातार हमला कर रहे हैं।
मंत्री ने अपने बयान में झारखंड के छात्र आंदोलन को राजनीतिक दृष्टि से भी उठाया और कांग्रेस से यह बताने को कहा कि वह छात्रों के अधिकारों को लेकर समान नीति क्यों नहीं अपनाती।
कांग्रेस की ओर से इस आरोप को लेकर अलग-अलग नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। विपक्षी दल आम तौर पर ऐसे आरोपों को सरकार की मूल समस्याओं से ध्यान भटकाने की कोशिश बताते रहे हैं।
झारखंड में छात्रों से जुड़े मुद्दों में भर्ती परीक्षाएं, रोजगार और सरकारी नियुक्तियों से संबंधित मांगें प्रमुख रही हैं। युवाओं में सरकारी नौकरियों की कमी और भर्ती प्रक्रिया में देरी को लेकर नाराजगी कई राज्यों में देखने को मिलती रही है।
बिहार में भी रोजगार और सरकारी भर्ती बड़ा राजनीतिक मुद्दा है। राज्य के लाखों युवा सरकारी और private sector jobs की तैयारी करते हैं और भर्ती प्रक्रिया में देरी या परीक्षाओं से जुड़े विवादों पर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं।
नितिन मिश्रा ने इसी संदर्भ में कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाया और कहा कि छात्रों के मुद्दों को राजनीतिक सुविधा के अनुसार नहीं देखा जाना चाहिए।
उनके बयान के बाद बिहार की राजनीति में कांग्रेस और BJP के बीच जुबानी जंग तेज होने की संभावना है। विपक्षी दल पहले से ही रोजगार, शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरते रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार ऐसे बयान चुनावी माहौल में ज्यादा महत्व रखते हैं क्योंकि युवा मतदाता बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण वर्ग हैं।
सरकार और विपक्ष दोनों ही युवाओं के रोजगार और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को अपने राजनीतिक अभियान का प्रमुख हिस्सा बना रहे हैं।
झारखंड छात्र आंदोलन का मुद्दा अब बिहार की राजनीति में भी राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में कांग्रेस की ओर से इस बयान का जवाब दिए जाने की संभावना है।
कुल मिलाकर, नितिन मिश्रा का बयान झारखंड के छात्र आंदोलन से आगे बढ़कर कांग्रेस के राजनीतिक रुख और युवाओं के मुद्दों पर उसकी नीति को लेकर सवाल खड़ा करता है। बिहार में यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बन सकता है।
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