Last updated: September 27th, 2026 at 03:56 pm

बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटर शिक्षा को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि अगले वर्ष से राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षा अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक योजना तैयार की जाए। सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ आधुनिक तकनीक से जोड़ना और उन्हें भविष्य की शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर तरीके से तैयार करना है।
मुख्यमंत्री ने यह निर्देश 26 सितंबर को पटना के दानापुर स्थित राजकीय मध्य विद्यालय रामजीचक में आयोजित अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी के दौरान दिया। कार्यक्रम में उन्होंने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों से बातचीत की तथा स्कूल में पढ़ाई, विद्यार्थियों की उपस्थिति और शैक्षणिक सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। इसी दौरान उन्होंने कंप्यूटर शिक्षा को सभी सरकारी विद्यालयों में उपलब्ध कराने की दिशा में काम शुरू करने को कहा।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत दो से तीन सरकारी स्कूलों के लिए एक कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर की व्यवस्था करने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य यह है कि स्कूलों में उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए विद्यार्थियों को नियमित रूप से कंप्यूटर की शिक्षा दी जा सके। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए शिक्षा विभाग को आवश्यक योजना तैयार करनी होगी।
सरकार का जोर केवल कंप्यूटर उपलब्ध कराने पर नहीं बल्कि विद्यार्थियों को तकनीक के व्यावहारिक इस्तेमाल से जोड़ने पर भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों के लिए आधुनिक तकनीक की जानकारी महत्वपूर्ण है। स्कूल स्तर पर कंप्यूटर शिक्षा मिलने से बच्चों को डिजिटल माध्यमों, ऑनलाइन शिक्षा और तकनीकी संसाधनों की शुरुआती समझ विकसित करने में मदद मिल सकती है।
बिहार में पहले से कुछ मॉडल स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षकों और लाइव क्लास की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। सरकारी जानकारी के अनुसार, राज्य में लगभग 700 स्थानों पर मॉडल स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षण और लाइव क्लास की व्यवस्था की गई है। सरकार इसी तरह की आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं का विस्तार सरकारी विद्यालयों में करने पर जोर दे रही है।
कंप्यूटर शिक्षा को अनिवार्य करने की योजना का संबंध स्कूलों में बुनियादी डिजिटल सुविधाओं के विस्तार से भी है। इसके लिए स्कूलों में कंप्यूटर, बिजली, इंटरनेट और प्रशिक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत करना जरूरी होगा। दो-तीन स्कूलों पर एक इंस्ट्रक्टर की व्यवस्था प्रस्तावित होने के कारण शिक्षकों और प्रशिक्षकों की उपलब्धता भी इस योजना के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से भी स्कूलों की सुविधाओं और पढ़ाई की व्यवस्था को लेकर सुझाव मांगे। उनका कहना है कि अभिभावकों और शिक्षकों के बीच नियमित संवाद से बच्चों की शैक्षणिक प्रगति को समझने और उनकी समस्याओं पर काम करने में मदद मिल सकती है। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों की पढ़ाई और नियमित स्कूल आने पर भी जोर दिया गया।
इस दौरान विद्यार्थियों को मोबाइल फोन के अनावश्यक इस्तेमाल से बचने और जरूरत के अनुसार पढ़ाई में इसका उपयोग करने की सलाह भी दी गई। सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार करने की योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को बदलते तकनीकी वातावरण के अनुरूप तैयार करना बताया गया है।
कंप्यूटर शिक्षा को सभी सरकारी स्कूलों में अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा विभाग को योजना तैयार करनी है। इसके बाद स्कूलों में इंस्ट्रक्टर, उपकरण और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था किस तरह होगी, इसका विस्तृत खाका सामने आएगा। योजना लागू होने के बाद बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को नियमित कंप्यूटर शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा।
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