Last updated: September 12th, 2026 at 03:43 pm

बिहार सरकार ने युवा और नए वकीलों को शुरुआती वर्षों में आर्थिक सहारा देने के लिए हर महीने ₹5,000 स्टाइपेंड देने की योजना लागू की है। इस योजना का उद्देश्य उन अधिवक्ताओं की मदद करना है, जिन्हें कानून की पढ़ाई पूरी करने और बार काउंसिल में नामांकन के बाद प्रैक्टिस शुरू करने के शुरुआती दौर में आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह सहायता अधिकतम तीन वर्षों तक दी जाएगी।
इस योजना के तहत बिहार स्टेट बार काउंसिल में निर्धारित अवधि में नामांकित युवा अधिवक्ताओं को लाभ देने की व्यवस्था की गई है। उपलब्ध दिशा-निर्देशों के अनुसार योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन की तारीख पर अधिवक्ता की उम्र 22 से 32 वर्ष के बीच होनी चाहिए। साथ ही अधिवक्ता का नामांकन बिहार स्टेट बार काउंसिल में होना और बिहार के किसी न्यायालय या ट्रिब्यूनल में प्रैक्टिस करना जरूरी है।
योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं है, बल्कि युवा अधिवक्ताओं को शुरुआती वर्षों में अपनी प्रैक्टिस स्थापित करने का अवसर देना भी है। नए वकीलों के लिए पेशे की शुरुआत में नियमित आय हासिल करना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में ₹5,000 की मासिक सहायता उनके कार्यालय, आने-जाने और पेशे से जुड़े दूसरे शुरुआती खर्चों में मदद कर सकती है।
योजना के लिए सक्रिय कानूनी प्रैक्टिस का प्रमाण भी जरूरी है। संबंधित बार एसोसिएशन से प्रैक्टिस या अनुभव का प्रमाणपत्र लिया जाना है। इसके अलावा उपलब्ध दिशा-निर्देशों में यह भी कहा गया है कि लाभार्थी किसी अन्य नौकरी, व्यवसाय या पेशे में संलग्न नहीं होना चाहिए। पहले किसी सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थान में नौकरी कर चुके अधिवक्ताओं के लिए भी पात्रता संबंधी शर्तें निर्धारित की गई हैं।
युवा वकीलों के लिए ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन यानी AIBE से जुड़ी शर्त भी रखी गई है। उपलब्ध योजना विवरण के अनुसार अधिवक्ता को नामांकन की तारीख से दो साल के भीतर AIBE पास करना होगा। इसके बाद ही आगे की अवधि के स्टाइपेंड से संबंधित पात्रता बनी रहेगी। एक वर्ष तक स्टाइपेंड लेने के बाद आगे की सहायता जारी रखने के लिए न्यूनतम पांच मामलों में पेश होने का प्रमाण भी देना होगा।
योजना में पारिवारिक आय और अन्य पेशेवर गतिविधियों से जुड़ी शर्तें भी शामिल हैं। उपलब्ध दिशा-निर्देशों में माता-पिता की वार्षिक आय ₹12 लाख से अधिक न होने की शर्त बताई गई है। आवेदक को बिहार का निवासी या डोमिसाइल धारक होना चाहिए और किसी आपराधिक मामले में दोषसिद्ध नहीं होना चाहिए। पैन कार्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेज भी आवेदन प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
स्टाइपेंड के भुगतान की व्यवस्था बिहार एडवोकेट्स वेलफेयर ट्रस्ट कमेटी के माध्यम से की जानी है। बार एसोसिएशन सक्रिय प्रैक्टिस और अन्य जरूरी दस्तावेजों के सत्यापन में भूमिका निभाएगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार योजना के आवेदन और क्रियान्वयन के लिए बिहार स्टेट बार काउंसिल से जुड़े निर्देशों का पालन करना होगा।
बिहार की यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब युवा अधिवक्ताओं की शुरुआती आर्थिक स्थिति को लेकर देशभर में चर्चा होती रही है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी 2024 में जूनियर अधिवक्ताओं के लिए न्यूनतम स्टाइपेंड का एक बेंचमार्क सुझाया था, जिसमें शहरी क्षेत्रों के लिए ₹20,000 और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ₹15,000 मासिक राशि की सिफारिश की गई थी। हालांकि यह राष्ट्रीय स्तर पर अनुशंसित बेंचमार्क है, बिहार की योजना में निर्धारित सहायता ₹5,000 प्रति माह है।
तीन वर्षों में पात्र अधिवक्ता को कुल ₹1.80 लाख तक की सहायता मिल सकती है, यदि वह पूरी अवधि के लिए योजना की सभी शर्तें पूरी करता है। इस सहायता से नए वकीलों को अपने शुरुआती पेशेवर वर्षों में कुछ आर्थिक स्थिरता मिलने की उम्मीद है। साथ ही, सक्रिय प्रैक्टिस और AIBE जैसी शर्तों के जरिए योजना का लाभ वास्तविक रूप से कानून के पेशे में काम कर रहे युवा अधिवक्ताओं तक पहुंचाने की कोशिश की गई है।
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