Last updated: September 30th, 2026 at 12:56 pm

बिहार सरकार किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली देने की तैयारी कर रही है। राज्य के ऊर्जा विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव को जल्द कैबिनेट के सामने रखा जा सकता है। फिलहाल किसानों को सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली पर 55 पैसे प्रति यूनिट की दर से भुगतान करना पड़ता है। प्रस्ताव लागू होने के बाद सिंचाई के लिए किसानों पर बिजली का खर्च कम या समाप्त करने की दिशा में कदम उठाया जाएगा।
प्रस्तावित योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में बिजली की उपलब्धता बढ़ाने के साथ किसानों की खेती की लागत कम करना है। जानकारी के अनुसार इससे राज्य के एक करोड़ से अधिक किसानों को लाभ मिलने की संभावना बताई गई है। हालांकि, योजना के अंतिम स्वरूप और इसके लागू होने की तारीख का फैसला कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।
इस योजना के साथ बिहार सरकार कृषि फीडरों के सोलराइजेशन पर भी जोर दे रही है। अगले तीन वर्षों में 2,560 कृषि फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने और करीब 2,585 मेगावाट बिजली तैयार करने का लक्ष्य प्रस्ताव में रखा गया है। इसके लिए लगभग 2,714 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना है।
सरकार की योजना के अनुसार सौर ऊर्जा से तैयार बिजली का इस्तेमाल कृषि फीडरों के माध्यम से सिंचाई के लिए किया जाएगा। इससे दिन के समय सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ाने और कृषि क्षेत्र के लिए बिजली की उपलब्धता को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। योजना को पीएम कुसुम योजना के मॉडल से भी जोड़ा गया है।
कृषि फीडरों के सोलराइजेशन का काम करने वाली एजेंसियों को सरकार की ओर से प्रति मेगावाट एक करोड़ पांच लाख रुपये तक का अनुदान देने का प्रस्ताव है। लक्ष्य के मुताबिक 2027 में 640 फीडरों से 646 मेगावाट, 2028 में 896 फीडरों से 905 मेगावाट और 2029 में 1,024 फीडरों से 1,034 मेगावाट सौर बिजली तैयार करने की योजना बताई गई है।
इस योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सोलर प्लांट के लिए भूमि बैंक तैयार करना भी है। इसके तहत सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए उपयुक्त जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जाएगी। जमीन उपलब्ध कराने वाले किसानों और अन्य जमीन मालिकों को निर्धारित राशि दिए जाने की योजना बताई गई है।
बिहार सरकार पहले से ही कृषि क्षेत्र में बिजली कनेक्शन और सौर ऊर्जा से जुड़ी योजनाओं पर काम कर रही है। ऊर्जा विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, मुख्यमंत्री कृषि विद्युत संबंध योजना के दूसरे चरण में इच्छुक किसानों को पटवन के लिए निःशुल्क कृषि विद्युत संबंध देने और जरूरी विद्युत ढांचे के निर्माण के लिए 2,190.75 करोड़ रुपये की स्वीकृत योजना पर काम चल रहा है। सितंबर 2026 में कृषि फीडरों के सोलराइजेशन के लिए भी विभागीय स्तर पर राशि आवंटित की गई है।
सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली मिलने से किसानों की उत्पादन लागत पर असर पड़ सकता है। खासकर उन किसानों को फायदा हो सकता है जो निजी पंपसेट या बिजली से चलने वाले सिंचाई उपकरणों पर निर्भर हैं। बिजली की उपलब्धता बढ़ने से फसल की जरूरत के अनुसार सिंचाई करना आसान हो सकता है।
सौर ऊर्जा पर जोर देने से सरकार कृषि क्षेत्र में पारंपरिक बिजली की मांग और ऊर्जा खरीद की लागत को भी कम करने का प्रयास कर रही है। प्रस्तावित मॉडल में कृषि फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़कर सिंचाई के लिए अपेक्षाकृत स्थायी बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने की योजना है।
यह योजना प्रस्ताव के स्तर पर है और इसके अंतिम स्वरूप के लिए कैबिनेट की मंजूरी जरूरी होगी। मंजूरी के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किसानों को मुफ्त सिंचाई बिजली किस प्रक्रिया के तहत मिलेगी, किन कनेक्शनों पर यह लागू होगी और सोलर प्लांट के लिए भूमि बैंक किस व्यवस्था के तहत बनाया जाएगा।
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