Last updated: November 5th, 2026 at 02:39 pm

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के एक बयान ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा था कि बिहार में क्राइम हो सकता है, लेकिन अपराध नहीं और अब राज्य में अपराध का कॉन्सेप्ट ही खत्म हो चुका है। उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और जन सुराज के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए उनकी टिप्पणी को लेकर सवाल उठाए हैं।
यह पूरा विवाद मंगलवार, 3 नवंबर को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ। बिहार सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच नदी जल प्रबंधन से जुड़े समझौते के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के विकास और कानून-व्यवस्था पर अपनी बात रखी। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद थे। अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य में अपराध की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण किया गया है।
सम्राट चौधरी ने कहा, “हमारे यहां कोई अपराध नहीं है। अपराध का कॉन्सेप्ट ही खत्म हो चुका है। क्राइम हो सकते हैं, लेकिन अपराध नहीं, कोई अपराधी नहीं है।” उनके इस बयान में इस्तेमाल किए गए अंग्रेजी शब्द ‘क्राइम’ और हिंदी शब्द ‘अपराध’ को लेकर सवाल उठने लगे, क्योंकि दोनों का अर्थ एक ही होता है। भाषण का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इस टिप्पणी को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। देखते ही देखते यह बयान राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया।
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और RJD के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री के बयान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री के भाषण का वीडियो साझा करते हुए सवाल किया कि जब मुख्यमंत्री के अनुसार बिहार में अपराध नहीं है, तो राज्य में सामने आने वाली आपराधिक घटनाओं को किस रूप में देखा जाना चाहिए। तेजस्वी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा और मुख्यमंत्री की नियुक्ति को लेकर कटाक्ष किया।
तेजस्वी यादव ने अपने बयान में सम्राट चौधरी के पुराने राजनीतिक विवादों का भी उल्लेख किया। उन्होंने मुख्यमंत्री पर सात हत्याओं से जुड़े मामले में आरोपी होने का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया कि उनके साथ मंच पर मौजूद IAS और IPS अधिकारी उनके नेतृत्व में काम करने पर खुद को सम्मानित महसूस करते हैं या अपमानित। हालांकि, यह तेजस्वी का राजनीतिक आरोप है। सम्राट चौधरी पहले भी अपने खिलाफ दर्ज पुराने मामले में खुद को झूठा फंसाया गया बताते रहे हैं। किसी आरोप को न्यायिक रूप से साबित हुआ तथ्य नहीं माना जा सकता।
अब इस विवाद में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर भी कूद पड़े हैं। उन्होंने 4 नवंबर को बेगूसराय में एक सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पर तंज कसा। प्रशांत किशोर ने कहा कि जब सातवीं कक्षा में असफल व्यक्ति को नेता बना दिया जाता है, तो इस तरह के बयान सुनने को मिलते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री हर पांच से दस दिन में कुछ ऐसा बोल देते हैं, जिससे लोगों को हंसने का मौका मिल जाता है। उनकी इस टिप्पणी के बाद विवाद और तेज हो गया।
दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस विवाद पर सीधे टिप्पणी करने से परहेज किया। हालांकि, उन्होंने मुख्यमंत्री के अपराध नियंत्रण संबंधी दृष्टिकोण की सराहना की। चिराग पासवान ने कहा कि मुख्यमंत्री के पास कानून-व्यवस्था से जुड़े तथ्यों और आंकड़ों की जानकारी होगी, जिसके आधार पर उन्होंने यह बात कही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बिहार अपराध मुक्त बने और निवेश के लिए बेहतर राज्य के रूप में उभरे।
दरअसल, बिहार में कानून-व्यवस्था का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस के केंद्र में रहा है। सत्ता पक्ष का दावा है कि पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने, तकनीक के इस्तेमाल और सख्त कार्रवाई के कारण अपराध पर नियंत्रण हुआ है। वहीं, विपक्ष लगातार हत्या, गोलीबारी, लूट और पुलिस कार्रवाई से जुड़ी घटनाओं को उठाकर सरकार को घेरता रहा है। हाल में मधुबनी में पुलिसकर्मी की कथित गोलीबारी से जुड़ी घटना ने भी कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
मुख्यमंत्री के बयान पर उठा विवाद केवल शब्दों के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने बिहार में अपराध नियंत्रण के दावों और वास्तविक स्थिति पर राजनीतिक बहस को फिर से तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार अपने दावों के समर्थन में कौन से आंकड़े और तथ्य सामने रखती है तथा विपक्ष इस मुद्दे को आने वाले दिनों में किस तरह आगे बढ़ाता है।
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