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बिहार में बाढ़ से करीब 50 लाख लोग प्रभावित, राहुल गांधी ने तेज राहत-बचाव अभियान की अपील की

बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। राज्य के 15 जिलों में करीब 49.67 लाख लोग बाढ़
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बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। राज्य के 15 जिलों में करीब 49.67 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। कई नदियां और उनकी सहायक धाराएं खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लगातार बारिश और नेपाल से बिहार की ओर आने वाली नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में तेज बारिश को बाढ़ की स्थिति बिगड़ने की प्रमुख वजह बताया जा रहा है।

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    बिहार आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, बाढ़ से प्रभावित 15 जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया शामिल हैं। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग बाढ़ के पानी से प्रभावित हुए हैं और कई जगहों पर सामान्य जनजीवन बाधित हुआ है। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

     

    बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, नेपाल से बिहार में आने वाली नदियों के कैचमेंट एरिया में लगातार बारिश के साथ राज्य के भीतर हुई बारिश ने भी जलस्तर बढ़ाने में भूमिका निभाई है। सितंबर में अब तक बिहार में 112.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो इस अवधि के सामान्य स्तर से लगभग छह प्रतिशत अधिक है।

     

    बाढ़ के बीच राहत और बचाव कार्यों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बिहार की स्थिति पर चिंता जताते हुए सरकार और प्रशासन से राहत एवं बचाव अभियान में तेजी लाने की अपील की। उन्होंने बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और प्रभावित परिवारों तक जरूरी सहायता जल्द पहुंचाने की मांग की।

     

    राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से भी बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि संकट की इस स्थिति में प्रभावित परिवारों तक हरसंभव सहायता पहुंचाने की जरूरत है। उनकी अपील में राहत, बचाव और आवश्यक सामान की उपलब्धता को प्राथमिकता देने की बात कही गई।

     

    बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में इस समय सबसे बड़ी चुनौती उन परिवारों तक जरूरी सामान पहुंचाना है जो पानी से घिरे हुए हैं या जिनका सामान्य आवागमन प्रभावित हुआ है। भोजन, पीने का पानी, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री की उपलब्धता प्रभावित आबादी के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण कुछ क्षेत्रों में राहत टीमों के लिए भी पहुंच बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

     

    स्थिति को देखते हुए प्रशासन के सामने प्रभावित आबादी तक राहत पहुंचाने के साथ-साथ संवेदनशील इलाकों में बचाव अभियान जारी रखने की चुनौती है। जिन क्षेत्रों में नदियां अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, वहां जलस्तर में किसी भी बदलाव पर नजर रखना जरूरी है। आने वाले समय में बारिश और नदियों के जलस्तर की स्थिति बाढ़ प्रभावित जिलों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।

     

    बिहार में करीब 50 लाख लोगों के प्रभावित होने का आंकड़ा बताता है कि यह केवल कुछ इलाकों तक सीमित संकट नहीं है। 15 जिलों में फैली बाढ़ ने प्रशासन के सामने बड़े स्तर पर राहत और बचाव की जरूरत पैदा कर दी है। फिलहाल सरकार और स्थानीय प्रशासन के सामने प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखना और जरूरतमंद परिवारों तक आवश्यक सहायता जल्द पहुंचाना है।

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