Last updated: September 15th, 2026 at 04:25 pm

फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में दिल्ली की अदालत ने पांच लोगों को दंगा करने, पुलिसकर्मियों पर हमला करने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोपों में दोषी करार दिया है। मामला भजनपुरा इलाके के एक पेट्रोल पंप के पास हुई हिंसा से जुड़ा है। अदालत ने हालांकि पेट्रोल पंप और कुछ वाहनों में आग लगाने के आरोपों में सभी पांचों को बरी कर दिया, क्योंकि इस आरोप को साबित करने के लिए उपलब्ध साक्ष्यों में गंभीर संदेह पाया गया।
अदालत के सामने अभियोजन पक्ष का कहना था कि 24 फरवरी 2020 को भजनपुरा इलाके में स्थिति तेजी से बिगड़ी थी। एक बड़ी भीड़ ने पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया और उन पर हमला किया। मामले में आरोप लगाया गया कि भीड़ ने पथराव और तोड़फोड़ की तथा आसपास मौजूद पेट्रोल पंप और वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पांचों आरोपियों की गैरकानूनी सभा में मौजूदगी और पुलिसकर्मियों पर हमले से जुड़े आरोपों को पर्याप्त रूप से साबित माना।
अदालत के फैसले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह रहा कि उसने आगजनी के आरोप को उसी स्तर पर स्वीकार नहीं किया। पेट्रोल पंप को आग लगाने और वाहनों में आगजनी करने के आरोपों के संबंध में अदालत ने अभियोजन के दावे पर गंभीर संदेह जताया। इसलिए पांचों आरोपियों को इन आरोपों से बरी कर दिया गया। इसका मतलब है कि अदालत ने मामले के सभी आरोपों को एक साथ साबित नहीं माना, बल्कि प्रत्येक आरोप के लिए उपलब्ध साक्ष्यों को अलग-अलग परखा।
दोषी ठहराए गए पांचों लोगों के खिलाफ दंगा करने और पुलिसकर्मियों को उनके कर्तव्य से रोकने तथा उन पर हमला करने से जुड़े कानूनी प्रावधानों के तहत मामला चला था। अदालत ने माना कि अभियोजन द्वारा पेश किए गए साक्ष्य यह स्थापित करने के लिए पर्याप्त थे कि आरोपी उस गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा थे जिसने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया।
यह मामला 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कई मामलों में से एक है। फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में हिंसा भड़क गई थी, जिसके दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा। इसके बाद पुलिस ने हिंसा से जुड़े अलग-अलग मामलों में जांच और मुकदमे की प्रक्रिया शुरू की। भजनपुरा पेट्रोल पंप से जुड़ा यह मामला भी उसी हिंसा के दौरान दर्ज किए गए मामलों में शामिल है।
अदालत के फैसले के बाद अब दोषी ठहराए गए पांच लोगों को किस तरह की सजा दी जाएगी, इस पर अगली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सजा की मात्रा पर दलीलें 16 सितंबर को सुनी जानी हैं। इसलिए फिलहाल अदालत ने दोषसिद्धि का फैसला दिया है, जबकि अंतिम सजा पर निर्णय अगली सुनवाई में होना है।
इस फैसले में अदालत का आगजनी के आरोपों पर अलग रुख भी महत्वपूर्ण है। जहां पुलिस पर हमला, गैरकानूनी सभा और सरकारी काम में बाधा डालने से जुड़े आरोपों को साक्ष्यों के आधार पर स्वीकार किया गया, वहीं पेट्रोल पंप जलाने के आरोप को पर्याप्त रूप से साबित नहीं माना गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि दंगों से जुड़े मामलों में अदालत प्रत्येक आरोप और उसके समर्थन में मौजूद साक्ष्यों का अलग-अलग मूल्यांकन कर रही है।
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