Last updated: September 3rd, 2026 at 01:58 pm

बिहार में आने वाले पांच वर्षों में बिजली क्षेत्र को बड़े पैमाने पर मजबूत करने की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार ने बिजली क्षेत्र में ₹1,38,541 करोड़ के निवेश की योजना सामने रखी है। यह निवेश बिजली उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ ट्रांसमिशन, वितरण, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण और आधुनिक डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने पर केंद्रित होगा। सरकार के मुताबिक बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों, शहरीकरण और घरेलू खपत को देखते हुए आने वाले वर्षों में बिजली की जरूरत तेजी से बढ़ने वाली है।
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2030 तक बढ़ने वाली बिजली की मांग को पूरा करना है। अनुमान के अनुसार बिहार में वर्ष 2030 तक बिजली की मांग लगभग 11,747 मेगावाट तक पहुंच सकती है। इसी भविष्य की जरूरत को ध्यान में रखते हुए उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ बिजली को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने वाले ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क में भी बड़े निवेश की योजना बनाई गई है।
यह निवेश प्रस्ताव नई दिल्ली में आयोजित Bharat Electricity 2026 के बिहार फोकस स्टेट सत्र में सामने रखा गया। कार्यक्रम में बिहार के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने निवेशकों और उद्योग जगत को राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया। सरकार का कहना है कि मजबूत और भरोसेमंद बिजली व्यवस्था बिहार में औद्योगिक विकास और नए निवेश के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार कर सकती है।
प्रस्तावित निवेश में बिजली उत्पादन को सबसे बड़ा हिस्सा मिलने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार उत्पादन क्षेत्र के लिए करीब ₹82,679 करोड़, ट्रांसमिशन के लिए ₹24,683 करोड़, वितरण व्यवस्था के लिए ₹28,809 करोड़ और रखरखाव के लिए लगभग ₹2,370 करोड़ का प्रावधान बताया गया है। इससे साफ है कि सरकार केवल बिजली उत्पादन बढ़ाने पर निर्भर नहीं रहना चाहती, बल्कि बिजली की पूरी सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
बिहार में बिजली वितरण व्यवस्था की वित्तीय स्थिति में भी सुधार का दावा किया गया है। अधिकारियों के अनुसार राज्य की दोनों बिजली वितरण कंपनियां वर्ष 2022 में संयुक्त रूप से करीब ₹2,218 करोड़ के घाटे में थीं, जबकि 2026 में इनके खाते में लगभग ₹2,375 करोड़ का अस्थायी लाभ दर्ज किया गया। इसके अलावा बिजली वितरण में तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान यानी AT&C losses में भी उल्लेखनीय कमी आने की बात कही गई है।
डिजिटल व्यवस्था को भी इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है। राज्य में 94 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाने की जानकारी दी गई है। स्मार्ट मीटर से बिजली खपत की निगरानी और बिलिंग व्यवस्था को अधिक डिजिटल बनाने में मदद मिल सकती है। सरकार बिजली क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाकर सप्लाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दे रही है।
निवेश योजना में नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण को भी जगह दी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार बिहार वर्ष 2030 तक लगभग 24 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और 6 GWh ऊर्जा भंडारण की दिशा में काम कर रहा है। इसमें रूफटॉप सोलर, कृषि फीडरों का सोलराइजेशन, सोलर-प्लस-स्टोरेज परियोजनाएं और पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं शामिल हैं। राज्य सरकार ने लगभग 2,400 MW क्षमता की पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के लिए समझौते किए हैं।
बिहार सरकार इस निवेश को केवल बिजली आपूर्ति सुधारने की योजना के तौर पर नहीं देख रही है। इसके पीछे राज्य में उद्योगों के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा तैयार करने और आर्थिक गतिविधियों को गति देने की रणनीति भी है। पर्याप्त और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध होने से औद्योगिक इकाइयों, छोटे कारोबार, कृषि क्षेत्र और घरेलू उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचने की उम्मीद है।
बिहार के बिजली क्षेत्र में प्रस्तावित ₹1,38,541 करोड़ का निवेश राज्य के ऊर्जा बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव ला सकता है। 2030 तक 11,747 मेगावाट की संभावित मांग को देखते हुए उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण तीनों स्तरों पर क्षमता बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। यदि प्रस्तावित परियोजनाएं समय पर जमीन पर उतरती हैं, तो इससे बिहार की बिजली व्यवस्था को अधिक मजबूत, डिजिटल और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने में मदद मिल सकती है।
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