Last updated: September 3rd, 2026 at 01:59 pm

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले की शिकारपुर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक और पूर्व राज्यमंत्री अनिल शर्मा का निधन हो गया। उन्होंने बुधवार, 2 सितंबर 2026 को दिल्ली के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह करीब 63 वर्ष के थे और लंबे समय से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर सामने आते ही बुलंदशहर के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी।
अनिल शर्मा बुलंदशहर के शिकारपुर क्षेत्र के गांव सुरजावली के रहने वाले थे। उनका राजनीतिक सफर स्थानीय स्तर से शुरू हुआ था और आगे चलकर वह विधानसभा तक पहुंचे। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक करियर में खुर्जा और शिकारपुर विधानसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह चार बार विधायक रहे—दो बार खुर्जा से और दो बार शिकारपुर से। वर्ष 2017 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर शिकारपुर विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी और इसके बाद 2022 में भी इसी सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे।
राजनीतिक जीवन में अनिल शर्मा ने केवल विधायक के रूप में ही काम नहीं किया, बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली थी। वर्ष 2019 में उन्हें योगी आदित्यनाथ सरकार में वन, पर्यावरण और जंतु उद्यान विभाग से जुड़े राज्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी मिली थी। इस दौरान वह राज्य सरकार के कामकाज और अपने विधानसभा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे।
अनिल शर्मा का राजनीतिक सफर 2000 के दशक की शुरुआत में विधानसभा चुनाव के साथ तेजी से आगे बढ़ा। वर्ष 2002 में उन्होंने खुर्जा विधानसभा सीट से जीत हासिल की और इसके बाद 2007 में भी वह इसी क्षेत्र से विधायक चुने गए। 2012 में उन्होंने शिकारपुर सीट से चुनाव लड़ा, हालांकि उस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद 2017 में भाजपा के टिकट पर शिकारपुर से जीत हासिल कर उन्होंने विधानसभा में वापसी की। 2022 में भी उन्होंने शिकारपुर सीट बरकरार रखी।
2022 के विधानसभा चुनाव में शिकारपुर सीट पर अनिल शर्मा को 1,13,855 वोट मिले थे और उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी पर करीब 55 हजार वोटों की बढ़त के साथ जीत दर्ज की थी। यह परिणाम क्षेत्र में उनके मजबूत राजनीतिक आधार को दर्शाता है। उनके निधन के बाद अब शिकारपुर विधानसभा सीट पर आगे की राजनीतिक प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा शुरू होना स्वाभाविक है।
उनके निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने अनिल शर्मा के निधन को पार्टी और क्षेत्र के लिए क्षति बताया तथा उनके परिवार और समर्थकों के प्रति संवेदना व्यक्त की। भाजपा नेताओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच भी उनके निधन की खबर से गहरा दुख देखा गया। लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहने के कारण शिकारपुर और आसपास के इलाकों में उनके साथ जुड़े लोगों की बड़ी संख्या रही है।
अनिल शर्मा के निधन की खबर ऐसे समय आई है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों की ओर बढ़ रही है। ऐसे में उनके निधन से शिकारपुर विधानसभा क्षेत्र की स्थानीय राजनीति में भी बदलाव की स्थिति बन गई है। हालांकि आगे पार्टी किसे मैदान में उतारती है या विधानसभा सीट को लेकर निर्वाचन संबंधी प्रक्रिया कब शुरू होती है, यह संबंधित संवैधानिक और चुनावी प्रक्रिया के अनुसार तय होगा।
बुलंदशहर में उनके समर्थकों और स्थानीय लोगों के बीच उनके निधन को लेकर भावनात्मक माहौल है। चार बार विधायक और पूर्व राज्यमंत्री के रूप में उनका लंबा राजनीतिक अनुभव क्षेत्र की राजनीति में महत्वपूर्ण रहा। उनके निधन के बाद भाजपा संगठन के सामने उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी और शिकारपुर सीट पर आगे की रणनीति को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लेने की स्थिति होगी।
शिकारपुर से भाजपा विधायक और पूर्व राज्यमंत्री अनिल शर्मा का निधन उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण घटना है। चार बार विधायक रहे शर्मा ने करीब दो दशक से अधिक समय तक सक्रिय राजनीति में अपनी भूमिका निभाई। उनके निधन से भाजपा ने एक अनुभवी जनप्रतिनिधि खो दिया है, वहीं बुलंदशहर के शिकारपुर क्षेत्र में भी उनके राजनीतिक जीवन से जुड़ी एक लंबी पारी का अंत हुआ है।
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