Last updated: August 15th, 2026 at 04:15 pm

बिहार में बढ़ते साइबर अपराध के बीच पुलिस ने लोगों को SIM कार्ड के गलत इस्तेमाल को लेकर सतर्क किया है। बिहार के DGP विनय कुमार ने चेतावनी दी है कि साइबर अपराधी कई SIM कार्ड का इस्तेमाल कर संगठित तरीके से लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। पुलिस ऐसे लोगों पर भी नजर रख रही है जिनके नाम पर बड़ी संख्या में SIM कार्ड जारी हुए हैं।
पुलिस के मुताबिक साइबर अपराध का तरीका लगातार बदल रहा है। अपराधी अलग-अलग मोबाइल नंबरों और SIM कार्ड के जरिए लोगों से संपर्क करते हैं और इसके बाद उन्हें बैंकिंग फ्रॉड, फर्जी लिंक, OTP या अन्य डिजिटल माध्यमों से निशाना बनाया जाता है।
DGP ने बताया कि ऐसे मामलों में कई SIM कार्ड एक ही व्यक्ति या नेटवर्क द्वारा इस्तेमाल किए जाने की आशंका रहती है। इसी वजह से बड़ी संख्या में SIM कार्ड लेने वाले लोगों की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि साइबर अपराधी अक्सर अपने वास्तविक नाम और पहचान छिपाने के लिए दूसरे लोगों के दस्तावेजों पर जारी SIM कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। इससे अपराध होने के बाद वास्तविक आरोपी तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
पुलिस अब SIM कार्ड से जुड़े रिकॉर्ड और उनके इस्तेमाल के pattern की जांच पर भी जोर दे रही है। किसी नंबर से लगातार संदिग्ध गतिविधियां होने पर उसके पीछे मौजूद व्यक्ति या नेटवर्क की पहचान करने की कोशिश की जा सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार जांच में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय साइबर गैंग के संकेत भी मिले हैं। इससे पुलिस के सामने चुनौती और बढ़ जाती है, क्योंकि ऐसे मामलों में अपराध का संचालन दूसरे राज्यों या देश के बाहर से भी किया जा सकता है।
साइबर अपराध में मोबाइल नंबर एक महत्वपूर्ण कड़ी होता है। किसी ठगी की शिकायत मिलने के बाद पुलिस call records, transaction details, SIM registration information और अन्य digital evidence की मदद से अपराध की chain जोड़ सकती है।
आम लोगों के लिए पुलिस ने सावधानी बरतने की अपील की है। किसी अनजान व्यक्ति को अपना SIM कार्ड इस्तेमाल करने के लिए देना या अपने दस्तावेजों पर किसी दूसरे व्यक्ति के नाम से SIM जारी करवाना भविष्य में गंभीर परेशानी पैदा कर सकता है।
लोगों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि बैंक, पुलिस या सरकारी अधिकारी बनकर फोन करने वाले किसी व्यक्ति के साथ OTP, PIN, CVV या banking password साझा न करें।
यदि किसी व्यक्ति के नाम पर उसकी जानकारी के बिना SIM कार्ड जारी हुआ है, तो उसे तुरंत संबंधित telecom operator से इसकी जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।
साइबर फ्रॉड होने पर शिकायत में देरी नहीं करनी चाहिए। शुरुआती समय में शिकायत मिलने पर financial transaction को रोकने या रकम की recovery की संभावना बढ़ सकती है।
पुलिस के लिए अब चुनौती केवल साइबर ठगी के बाद आरोपियों को गिरफ्तार करना नहीं है, बल्कि उन networks की पहचान करना भी है जो बड़ी संख्या में SIM कार्ड और bank accounts का इस्तेमाल करते हैं।
बिहार में डिजिटल भुगतान और online banking के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध से जुड़े मामलों की रोकथाम पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल हो गई है।
बिहार DGP ने साइबर अपराध के बढ़ते खतरे के बीच SIM कार्ड आधारित संगठित फ्रॉड नेटवर्क को लेकर लोगों को चेतावनी दी है। पुलिस बड़ी संख्या में SIM कार्ड लेने वाले संदिग्ध लोगों की निगरानी कर रही है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े साइबर नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।
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