Last updated: August 7th, 2026 at 05:15 pm

बिहार में ATM नेटवर्क में लगातार कमी आने की रिपोर्ट सामने आई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले करीब नौ महीनों में राज्य में 371 ATM बंद हुए हैं, जिसका सबसे ज्यादा असर राजधानी पटना में देखने को मिला है। ATM की संख्या घटने से खासकर उन इलाकों में लोगों को परेशानी हो सकती है जहां बैंक शाखाएं या अन्य डिजिटल बैंकिंग सुविधाएं सीमित हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, बैंकों द्वारा ATM नेटवर्क की समीक्षा और परिचालन लागत को कम करने की रणनीति के कारण कई मशीनों को बंद किया गया है। बैंकिंग क्षेत्र में डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद ATM अभी भी बड़ी संख्या में ग्राहकों के लिए नकद निकासी का महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है।
पटना में ATM की उपलब्धता कम होने का असर शहर के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों पर पड़ सकता है। विशेष रूप से बुजुर्गों, ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों और उन ग्राहकों के लिए समस्या बढ़ सकती है जो डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल कम करते हैं।
बैंकों की ओर से पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और UPI जैसे विकल्पों के बढ़ते इस्तेमाल ने नकद लेनदेन की जरूरत को कुछ हद तक कम किया है। इसके बावजूद ATM का महत्व पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि कई जगहों पर अभी भी नकद भुगतान की आवश्यकता रहती है।
ATM संचालन में मशीन का किराया, रखरखाव, सुरक्षा, नकदी भरने की लागत और बिजली जैसी कई लागत शामिल होती हैं। बैंक ऐसे ATM को बंद करने का निर्णय ले सकते हैं जहां लेनदेन की संख्या कम हो या संचालन लागत अधिक हो। हालांकि ग्राहकों की सुविधा और भौगोलिक पहुंच को ध्यान में रखना भी जरूरी माना जाता है।
बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार, ATM की संख्या कम होने के साथ-साथ बैंक शाखाओं और वैकल्पिक कैश पॉइंट की उपलब्धता बनाए रखना आवश्यक है। यदि किसी इलाके में ATM बंद किया जाता है तो उसके आसपास दूसरा ATM या बैंकिंग सुविधा उपलब्ध होना चाहिए, ताकि ग्राहकों को लंबी दूरी तय न करनी पड़े।
बिहार जैसे बड़े राज्य में ATM नेटवर्क का महत्व और अधिक है। राज्य के कई ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इंटरनेट कनेक्टिविटी, डिजिटल साक्षरता और स्मार्टफोन की उपलब्धता में अभी भी क्षेत्रीय अंतर है। ऐसे क्षेत्रों में नकद निकासी के लिए ATM की जरूरत बनी रहती है।
ATM बंद होने का एक दूसरा असर उन छोटे कारोबारियों पर भी पड़ सकता है जिनके ग्राहक अभी भी नकद भुगतान करते हैं। हालांकि UPI और अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों ने इस समस्या को काफी हद तक कम किया है, लेकिन हर ग्राहक डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल नहीं करता।
बैंकिंग क्षेत्र में ATM नेटवर्क को लेकर एक और बदलाव यह है कि कई बैंक पारंपरिक ATM के बजाय कम लागत वाले डिजिटल बैंकिंग मॉडल पर ध्यान दे रहे हैं। माइक्रो-ATM, बैंकिंग प्रतिनिधि और डिजिटल भुगतान सेवाएं भी ग्राहकों को बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराने के वैकल्पिक माध्यम बन रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ATM की संख्या घटाना अपने आप में समस्या नहीं है, यदि उसके स्थान पर पर्याप्त वैकल्पिक बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध हों। लेकिन यदि किसी क्षेत्र में ATM बंद होने के बाद कोई वैकल्पिक कैश निकासी सुविधा नहीं है, तो इसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ सकता है।
पटना में ATM नेटवर्क में कमी को लेकर ग्राहकों की सुविधा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। राजधानी होने के कारण यहां बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी, छात्र, व्यापारी और बाहर से आने वाले लोग बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं।
बैंकों के लिए चुनौती यह है कि डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देने के साथ-साथ उन ग्राहकों के लिए भी पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध रखी जाएं जो नकद लेनदेन पर निर्भर हैं। भविष्य में ATM नेटवर्क और डिजिटल बैंकिंग के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण होगा।
बिहार में 371 ATM बंद होने की रिपोर्ट ने राज्य में बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बैंक बंद किए गए ATM की जगह वैकल्पिक सेवाएं उपलब्ध कराते हैं या नहीं और डिजिटल बैंकिंग के विस्तार के साथ ग्राहकों की नकद निकासी संबंधी जरूरतों को किस तरह पूरा किया जाता है।
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