Last updated: October 13th, 2026 at 03:30 pm

बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में छात्र और युवा संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (RYA) के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने गांधी मैदान से लोक भवन की ओर मार्च निकाला। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को वापस लेने और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग उठाई गई। मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बन गई, जिसके बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र और युवा शामिल हुए। मार्च को देखते हुए प्रशासन ने गांधी मैदान, जेपी गोलंबर, डाकबंगला चौराहे और आसपास के प्रमुख मार्गों पर पुलिस बल तैनात किया था। प्रशासन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि पटना में धरना-प्रदर्शन के लिए गर्दनीबाग निर्धारित स्थल है और अन्य स्थानों पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी गांधी मैदान के पास जुटे और लोक भवन की ओर आगे बढ़ने लगे।
प्रदर्शन के दौरान जेपी गोलंबर के पास पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड को प्रदर्शनकारियों ने तोड़ दिया। इसके बाद भीड़ डाकबंगला चौराहे की ओर बढ़ी, जहां पुलिस ने आगे जाने से रोकने के लिए अतिरिक्त बैरिकेडिंग कर रखी थी। यहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और कहासुनी की स्थिति बनी। कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पर चढ़कर आगे बढ़ने की कोशिश करते दिखाई दिए। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कार्रवाई की और रिपोर्टों के अनुसार करीब दो दर्जन प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
इस मार्च का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर उठ रहे सवाल थे। प्रदर्शनकारी संगठनों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। उनका दावा है कि कुछ मामलों में जीवित लोगों के नाम भी मृत मतदाताओं की सूची में दर्ज कर दिए गए, जिससे उनके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। संगठनों ने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने और चुनाव आयोग की जवाबदेही तय करने की मांग की। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है और इन्हें प्रदर्शनकारियों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि मतदाता सूची से जुड़े विवादों पर स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए। AISA और RYA के नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मतदाता सूची की शुद्धता बेहद महत्वपूर्ण है और किसी भी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने SIR प्रक्रिया को वापस लेने और बिहार तथा पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया से संबंधित कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग भी उठाई।
वहीं, प्रशासन का कहना है कि शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और आम लोगों की आवाजाही सुचारु रखना उसकी प्राथमिकता है। निर्धारित स्थल से बाहर प्रदर्शन होने पर प्रमुख सड़कों पर जाम लगने की आशंका रहती है। इससे स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, न्यायालयों और व्यावसायिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। आपातकालीन सेवाओं, एंबुलेंस और आम यात्रियों के आवागमन में बाधा न आए, इसी वजह से प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से तय स्थल पर ही विरोध दर्ज कराने की अपील की थी।
पटना में हुआ यह प्रदर्शन ऐसे समय पर सामने आया है, जब SIR को लेकर देश के कई हिस्सों में राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों की ओर से विरोध किया जा रहा है। इससे एक दिन पहले दिल्ली में राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के नेताओं ने भी इस मुद्दे पर मार्च निकाला था। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल हैं, जबकि चुनाव आयोग ने किसी राजनीतिक दल के पक्ष में काम करने के आरोपों को खारिज किया है।
पटना में प्रदर्शन के बाद SIR को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं। इस पूरे मामले में आगे की स्थिति आयोग की प्रतिक्रिया, न्यायिक प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्भर करेगी। प्रदर्शनकारी संगठनों ने अपनी मांगों को आगे भी उठाने के संकेत दिए हैं, जबकि प्रशासन ने शहर में कानून-व्यवस्था और यातायात बनाए रखने पर जोर दिया है।
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