Last updated: October 13th, 2026 at 03:31 pm
बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के दौरान आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने योजना एवं विकास विभाग से जुड़े एक कार्यपालक अभियंता के कई ठिकानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई में 50 लाख रुपये से अधिक नकद, आभूषण और संपत्ति से संबंधित दस्तावेज बरामद किए गए। मामला आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों से जुड़ा है। जांच एजेंसी अब बरामद नकदी, निवेश, जमीन और अन्य संपत्तियों से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि संबंधित संपत्तियां किन स्रोतों से अर्जित की गईं।
यह कार्रवाई कार्यपालक अभियंता नारद कुमार दास से जुड़े ठिकानों पर की गई। वह बिहार सरकार के योजना एवं विकास विभाग में कार्यरत हैं और मुंगेर में स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन (LAEO) के कार्य प्रमंडल से जुड़े पद पर तैनात बताए गए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, उनके खिलाफ ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद निगरानी से संबंधित विशेष अदालत से तलाशी वारंट प्राप्त कर अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की गई।
EOU की टीमों ने पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और मुंगेर में कुल पांच स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इनमें संबंधित अधिकारी के आवास, मुजफ्फरपुर स्थित एक फ्लैट और मुंगेर में सरकारी कार्यालय से जुड़े परिसर भी शामिल थे। कार्रवाई के दौरान मुजफ्फरपुर स्थित फ्लैट से बड़ी मात्रा में नकदी मिली। नोटों की गिनती के लिए मशीन का इस्तेमाल किया गया। शुरुआती रिपोर्टों में बरामद नकदी की मात्रा 50 लाख रुपये से अधिक बताई गई, जबकि अलग-अलग समाचार रिपोर्टों में अंतिम रकम के आंकड़ों में अंतर सामने आया।
जांच एजेंसी के अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में करीब 83.53 लाख रुपये की ऐसी संपत्ति के संकेत मिले हैं, जो अधिकारी की ज्ञात वैध आय से अधिक होने का संदेह है। यह राशि उनकी ज्ञात आय से लगभग 64.93 प्रतिशत अधिक बताई गई है। इसी आधार पर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कर तलाशी की कार्रवाई की गई। हालांकि, यह प्रारंभिक जांच का निष्कर्ष है। संपत्ति के स्रोत, वास्तविक मूल्य और आरोपों की पुष्टि विस्तृत जांच तथा कानूनी प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
छापेमारी के दौरान नकदी के अलावा आभूषण, जमीन की खरीद से जुड़े कागजात, निवेश संबंधी दस्तावेज और बैंक खातों की जानकारी भी सामने आई। मुंगेर स्थित आवास से नकदी और आभूषण मिलने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा बीमा और निवेश से जुड़े दस्तावेज तथा बैंक पासबुक भी जांच के दायरे में हैं। एजेंसी इन दस्तावेजों के माध्यम से अधिकारी की आय, खर्च, निवेश और संपत्ति अर्जित करने के तरीके का मिलान कर रही है।
जांच में पटना में जमीन की खरीद से संबंधित दस्तावेज भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2026 में रुपसपुर थाना क्षेत्र के कुसुमपुरम इलाके में एक आवासीय भूखंड खरीदने से जुड़े रिकॉर्ड मिले हैं। यह भूखंड अधिकारी की सास के नाम पर खरीदे जाने की बात सामने आई है। एजेंसी बैंक लेनदेन और परिवार के सदस्यों के खातों से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जमीन की खरीद के लिए धन कहां से आया था। केवल किसी रिश्तेदार के नाम पर संपत्ति होने से अपने आप अपराध साबित नहीं होता; इसके लिए धन के वास्तविक स्रोत और लेनदेन की जांच जरूरी है।
बिहार में आर्थिक अपराध इकाई सरकारी अधिकारियों की कथित आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच करती है। ऐसी कार्रवाई में संपत्ति के दस्तावेजों, बैंक खातों, निवेश और ज्ञात आय का विस्तृत मिलान किया जाता है। यदि जांच के दौरान पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ आगे की कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। इस मामले में भी जब्त दस्तावेजों की जांच और संपत्तियों के मूल्यांकन से आगे की कार्रवाई की दिशा तय होगी।
यह मामला जांच के चरण में है। बरामद नकदी और अन्य संपत्तियों के संबंध में अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है। जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई और आधिकारिक जानकारी से यह स्पष्ट होगा कि कथित आय से अधिक संपत्ति का कुल मूल्य कितना है और किन संपत्तियों के स्रोतों पर सवाल उठते हैं। इस कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी अधिकारियों की संपत्ति और आय के बीच पारदर्शिता बनाए रखने तथा भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता को चर्चा में ला दिया है।
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