Last updated: June 1st, 2026 at 03:57 pm

भारत और मध्य पूर्व के देशों के बीच संबंध पिछले कुछ वर्षों में केवल ऊर्जा आयात तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि अब यह साझेदारी व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक और कनेक्टिविटी जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक फैल चुकी है। बदलते वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक माहौल के बीच भारत इस क्षेत्र के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में सक्रिय दिखाई दे रहा है।
मध्य पूर्व लंबे समय से भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा का प्रमुख स्रोत रहा है। भारत अपनी तेल और गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा करता है। हाल के वैश्विक तनावों और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों के बीच भारत ने क्षेत्र के देशों के साथ ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया है। भारत और ओमान के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों को मजबूत करने में मदद कर सकता है।
हाल ही में भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच ऊर्जा, रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और व्यापार से जुड़े कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। इन समझौतों के तहत अबू धाबी ने भारत में 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा भी की है। दोनों देशों ने रणनीतिक तेल भंडार, एलपीजी आपूर्ति और उन्नत तकनीक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और UAE के संबंध अब केवल ऊर्जा साझेदारी तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, बंदरगाह विकास, शिपिंग और रक्षा उद्योग जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से सहयोग बढ़ा रहे हैं। इससे भारत को निवेश और तकनीकी विकास के नए अवसर मिल सकते हैं।
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEC) भी वर्तमान समय में सबसे चर्चित परियोजनाओं में शामिल है। भारत, मध्य पूर्व और यूरोप को जोड़ने वाली यह परियोजना वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हाल ही में भारत और इटली ने इस कॉरिडोर को आगे बढ़ाने और व्यापारिक संपर्कों को मजबूत करने पर सहमति जताई। दोनों देशों ने इसे वैश्विक व्यापार, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती के लिए परिवर्तनकारी पहल बताया।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि IMEC केवल एक व्यापारिक परियोजना नहीं बल्कि एक रणनीतिक कनेक्टिविटी नेटवर्क है, जो भारत को यूरोप और मध्य पूर्व के साथ अधिक तेज़ और प्रभावी तरीके से जोड़ सकता है। इसे वैश्विक व्यापार मार्गों में भारत की भूमिका बढ़ाने वाले बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के मुद्दों पर भी भारत की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। हाल ही में इज़राइल ने सार्वजनिक रूप से कहा कि मध्य पूर्व में स्थिरता और संतुलन बनाए रखने में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण है। यह बयान भारत के बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव को दर्शाता है।
इसके साथ ही भारत ने BRICS मंच पर भी मध्य पूर्व संकट को लेकर चिंता व्यक्त की और क्षेत्र में शांति तथा स्थिरता के लिए संवाद आधारित समाधान पर जोर दिया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को महत्वपूर्ण बताते हुए सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व के साथ मजबूत संबंध भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक विस्तार और निवेश आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही यह साझेदारी भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और रणनीतिक व्यापार मार्गों में भी अधिक मजबूत स्थिति प्रदान कर सकती है।
फिलहाल भारत और मध्य पूर्व देशों के बीच बढ़ता सहयोग केवल द्विपक्षीय संबंधों की कहानी नहीं है, बल्कि यह बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका का भी संकेत देता है। आने वाले वर्षों में व्यापार, निवेश और कनेक्टिविटी परियोजनाओं के जरिए यह साझेदारी और मजबूत होने की संभावना है।
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