Last updated: July 4th, 2026 at 03:19 pm

भारत और फ्रांस के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और फ्रांस के अर्थव्यवस्था, वित्त, उद्योग, ऊर्जा एवं डिजिटल संप्रभुता मंत्री रोलां लेस्क्यूर ने फ्रांस के ऐक्स-आँ-प्रोवांस में आयोजित भारत-फ्रांस आर्थिक एवं वित्तीय संवाद (Economic & Financial Dialogue) की संयुक्त अध्यक्षता की। बैठक में दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने और रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर व्यापक चर्चा की।
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण विषय क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) के क्षेत्र में सहयोग रहा। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि ऊर्जा सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा उत्पादन और आधुनिक तकनीकी उद्योगों के लिए आवश्यक खनिजों की सुरक्षित एवं स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। इसके साथ ही मजबूत और भरोसेमंद वैश्विक सप्लाई चेन विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
दोनों पक्षों ने भारत और फ्रांस के बीच पारस्परिक निवेश (Cross-Investments) बढ़ाने पर भी चर्चा की। सरकारों का मानना है कि यदि दोनों देशों की कंपनियां एक-दूसरे के बाजारों में अधिक निवेश करती हैं, तो व्यापार, रोजगार और तकनीकी सहयोग को नई गति मिलेगी। वित्तीय संस्थानों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करने और पूंजी प्रवाह को आसान बनाने के प्रस्तावों पर भी विचार किया गया।
बैठक में हाई-स्पीड रेलवे क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। इससे पहले दोनों देशों के बीच रेलवे सहयोग को लेकर आशय-पत्र (Declaration of Intent) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। अब इस क्षेत्र में तकनीकी सहयोग, निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास की संभावनाओं को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। इसके अलावा शहरी अवसंरचना, स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन से जुड़े परियोजनाओं में भी संयुक्त कार्य करने की इच्छा व्यक्त की गई।
भारत और फ्रांस ने बहुपक्षीय मंचों जैसे G20 और पेरिस क्लब में भी आपसी समन्वय बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों देशों का मानना है कि बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में समान विचार वाले देशों के बीच सहयोग बढ़ाना आवश्यक है, ताकि वैश्विक वित्तीय स्थिरता, टिकाऊ विकास और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि क्रिटिकल मिनरल्स आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण संसाधनों में शामिल होंगे। लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरियों, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरणों और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। ऐसे में भारत का फ्रांस जैसे रणनीतिक साझेदार के साथ इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना दीर्घकालिक आर्थिक और तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने इस आर्थिक एवं वित्तीय संवाद को भविष्य में आर्थिक, निवेश, व्यापार, प्रौद्योगिकी और वित्तीय सहयोग के लिए प्रमुख मंच के रूप में उपयोग करने पर सहमति जताई है। साथ ही अगले संस्करण का आयोजन 2027 में करने की संभावना पर भी चर्चा हुई। इससे स्पष्ट है कि भारत और फ्रांस अपनी विशेष रणनीतिक साझेदारी को और गहरा बनाने के लिए दीर्घकालिक रोडमैप पर काम कर रहे हैं।
भारत और फ्रांस के बीच बढ़ता आर्थिक सहयोग ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता सबसे बड़े आर्थिक मुद्दों में शामिल हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच यह समझौता न केवल द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देगा, बल्कि भारत की “विकसित भारत 2047” की आर्थिक दृष्टि और फ्रांस की वैश्विक आर्थिक रणनीति को भी नई मजबूती प्रदान कर सकता है।
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