Last updated: July 5th, 2026 at 03:07 pm

भारत सरकार ने एथेनॉल आधारित ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए E85 पेट्रोल के विस्तार की प्रक्रिया तेज कर दी है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस पर E85 ईंधन की शुरुआत किए जाने के बाद अब इसे चरणबद्ध तरीके से देश के अधिक पेट्रोल पंपों तक पहुंचाने की योजना पर काम किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम होगी, किसानों को लाभ मिलेगा और स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
E85 ऐसा ईंधन है जिसमें लगभग 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है। यह सामान्य वाहनों के लिए नहीं, बल्कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (Flex-Fuel Vehicles – FFVs) के लिए बनाया गया है। ऐसे वाहन E20 से लेकर E85 और कुछ मामलों में E100 तक के एथेनॉल मिश्रण पर चल सकते हैं। इसलिए मौजूदा पेट्रोल कारों में E85 का उपयोग तभी किया जाना चाहिए जब वाहन निर्माता इसकी अनुमति देता हो।
सरकार ने शुरुआत में E85 ईंधन को सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों के 48 पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध कराया है। योजना है कि वर्ष 2026 के अंत तक इसकी उपलब्धता लगभग 500 पेट्रोल पंपों तक बढ़ाई जाए, जबकि आगे चलकर इसे और व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने की तैयारी है।
सरकार के अनुसार E85 की कीमत सामान्य E20 पेट्रोल की तुलना में लगभग 20 रुपये प्रति लीटर कम रखी गई है। इससे फ्लेक्स-फ्यूल वाहन चलाने वाले उपभोक्ताओं को ईंधन लागत में बचत हो सकती है। साथ ही अधिक एथेनॉल उपयोग होने से पेट्रोल की खपत कम होगी और विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी।
भारत पिछले कुछ वर्षों से एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। पहले E10 और फिर E20 लागू किया गया। अब E85 को शामिल कर सरकार जैव-ईंधन आधारित परिवहन प्रणाली विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसका उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना, कार्बन उत्सर्जन कम करना और गन्ना, मक्का तथा अन्य कृषि फसलों से बनने वाले एथेनॉल की मांग बढ़ाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि E85 कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिल सकता है। एथेनॉल उत्पादन में गन्ने के रस, शीरे (Molasses) और मक्का जैसी कृषि उपज का उपयोग होता है। इससे कृषि क्षेत्र को अतिरिक्त बाजार मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना है। साथ ही भारत का आयातित कच्चे तेल पर खर्च भी धीरे-धीरे कम हो सकता है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि E85 का लाभ तभी मिलेगा जब फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का उत्पादन और बिक्री बढ़ेगी। वर्तमान में भारत की अधिकांश कारें E20 के अनुरूप बनाई जा रही हैं, जबकि E85 के लिए विशेष इंजन तकनीक की आवश्यकता होती है। इसलिए वाहन उद्योग और ईंधन अवसंरचना दोनों का समान गति से विकास आवश्यक माना जा रहा है।
कुल मिलाकर E85 ईंधन का विस्तार भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। यदि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का प्रसार बढ़ता है और ईंधन उपलब्धता का नेटवर्क मजबूत होता है, तो आने वाले वर्षों में भारत जैव-ईंधन आधारित परिवहन के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
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