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मेरठ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बाढ़ का खतरा बढ़ा, प्रशासन अलर्ट पर; राहत एवं बचाव दल तैनात

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के बाद कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। भारत
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के बाद कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा भारी वर्षा की चेतावनी जारी किए जाने के बाद मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, शामली और आसपास के जिलों में प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है। नदियों के जलस्तर में लगातार वृद्धि को देखते हुए जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं।

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    प्रशासन के अनुसार, गंगा, हिंडन और अन्य नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। सिंचाई विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग की संयुक्त टीमें तटबंधों का निरीक्षण कर रही हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में समय रहते कार्रवाई की जा सके। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।

    जिला प्रशासन ने बाढ़ संभावित गांवों की सूची तैयार कर ली है। इन क्षेत्रों में राहत सामग्री, दवाइयां, पेयजल और आवश्यक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमों को भी जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रखा गया है।

    लगातार बारिश के कारण कई ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में पानी भर गया है। किसानों ने धान, गन्ना और अन्य फसलों को नुकसान की आशंका जताई है। कृषि विभाग ने किसानों को मौसम विभाग की सलाह के अनुसार खेती से जुड़े कार्य करने और खेतों से पानी निकालने के लिए आवश्यक कदम उठाने की सलाह दी है।

    बारिश का असर सड़क यातायात पर भी दिखाई दे रहा है। कई ग्रामीण संपर्क मार्गों पर जलभराव की स्थिति बन गई है, जिससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। लोक निर्माण विभाग को क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों की लगातार निगरानी करने तथा आवश्यक मरम्मत कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।

    स्वास्थ्य विभाग ने भी संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीमों को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। बाढ़ के दौरान जलजनित बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इसे देखते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों का अतिरिक्त भंडारण किया गया है। लोगों से केवल स्वच्छ पेयजल का उपयोग करने और स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करने की अपील की गई है।

    प्रशासन ने आम नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचना पर भरोसा करने की अपील की है। किसी भी आपात स्थिति की जानकारी देने के लिए जिला कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि मौसम और जलस्तर की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त राहत एवं बचाव दल भी तैनात किए जाएंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों तक मानसून सक्रिय रहने के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश जारी रह सकती है। यदि वर्षा का यही क्रम बना रहा तो नदियों का जलस्तर और बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच समन्वय बनाए रखना बेहद आवश्यक होगा।

    मेरठ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिले अलर्ट मोड पर हैं। जिला प्रशासन, पुलिस, सिंचाई विभाग, स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन एजेंसियां संयुक्त रूप से स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

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