Last updated: September 24th, 2026 at 02:53 pm

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात एक स्लीपर बस में भीषण आग लगने से नौ यात्रियों की मौत हो गई। हादसा जेवर इलाके में 33 किलोमीटर के आसपास हुआ, जब बस दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा की ओर जा रही थी। हादसे के समय बस में करीब 30 से 35 यात्री सवार बताए गए हैं। आग इतनी तेजी से फैली कि कई यात्रियों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला, जबकि कई लोगों ने खिड़कियों से कूदकर अपनी जान बचाई।
पुलिस के अनुसार घटना बुधवार रात करीब 11 बजे से 11:30 बजे के बीच हुई। बस का रजिस्ट्रेशन बिहार का बताया गया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक बस में आग लगने के बाद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। कुछ यात्रियों ने खिड़कियों के शीशे तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की। आग बुझाने के लिए दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
हादसे में नौ यात्रियों की मौत हुई है। अधिकारियों के अनुसार मृतकों की पहचान की प्रक्रिया मुश्किल हो रही है, क्योंकि आग में शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। पुलिस बस की टिकट बुकिंग और यात्रियों की जानकारी के आधार पर उनके परिजनों से संपर्क कर रही है। जरूरत पड़ने पर DNA जांच के जरिए भी पहचान की पुष्टि की जाएगी।
घटना के बाद राहत और बचाव दल ने बस को खाली कराया। कई यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार दिया गया। रिपोर्टों के मुताबिक कुछ यात्रियों को चोटें भी आई हैं। हादसे के बाद कुछ समय के लिए यमुना एक्सप्रेसवे पर यातायात प्रभावित हुआ और सुरक्षा कारणों से आसपास के हिस्से में वाहनों की आवाजाही नियंत्रित की गई। बाद में स्थिति सामान्य होने पर यातायात बहाल किया गया।
पुलिस की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग बस के AC सिस्टम में स्पार्क या ब्लास्ट के बाद फैलने की आशंका है। बताया गया है कि इसके बाद इंजन के लुब्रिकेंट ऑयल ने आग पकड़ ली और कुछ ही समय में आग बस के दूसरे हिस्सों तक पहुंच गई। हालांकि आग लगने का अंतिम कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
इस हादसे को लेकर FIR में बस के ड्राइवर और कंडक्टर की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। एक यात्री की शिकायत के आधार पर दर्ज FIR में आरोप है कि आग लगने से पहले बस में जलने जैसी गंध महसूस हुई थी और यात्रियों ने चालक को बस रोकने के लिए कहा था। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि चालक ने बस रोकने से इनकार किया। ये आरोप FIR में दर्ज शिकायत का हिस्सा हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के जरिए होनी बाकी है।
पुलिस ने हादसे के मामले में बस के ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार किया है। दोनों के खिलाफ दर्ज मामले में घटना की परिस्थितियों और उनकी कथित भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बस की तकनीकी स्थिति कैसी थी और क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था।
हादसे के बाद बस की फिटनेस, रखरखाव और संचालन से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि बस में अग्निशमन उपकरण उपलब्ध थे या नहीं, आपात स्थिति में यात्रियों के बाहर निकलने के पर्याप्त रास्ते थे या नहीं और बस की तकनीकी जांच समय पर हुई थी या नहीं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। रिपोर्ट के अनुसार मृतकों के परिवारों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी घटना पर शोक व्यक्त किया और अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। प्रशासन की ओर से सुरक्षित बचे यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
यह हादसा लंबी दूरी की स्लीपर बसों में यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े सवालों को भी सामने लाता है। खासकर रात के सफर में आग जैसी आपात स्थिति आने पर यात्रियों के पास बाहर निकलने के लिए कितना समय और कितने सुरक्षित रास्ते उपलब्ध होते हैं, यह महत्वपूर्ण हो जाता है। हालांकि इस विशेष मामले में सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस हादसे के कारणों, बस की तकनीकी स्थिति, ड्राइवर और कंडक्टर की भूमिका तथा मृतकों की पहचान की प्रक्रिया पर काम कर रही है। आग लगने का वास्तविक कारण और घटना में किसी लापरवाही की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
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