Last updated: October 14th, 2026 at 03:03 pm

उत्तर प्रदेश में सरकारी भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े एक पुराने मामले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को सेवानिवृत्त IAS अधिकारी योगेश कुमार को लखनऊ के गोमती नगर इलाके से गिरफ्तार किया। यह मामला वर्ष 2014 में पशुपालन विभाग में हुई पशुधन प्रसार अधिकारी भर्ती से जुड़ा है। उस समय विभाग में प्रमुख सचिव के पद पर कार्यरत रहे योगेश कुमार की भूमिका लंबे समय से जांच के दायरे में थी। उनकी गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता, चयन प्रक्रिया के नियमों और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
यह भर्ती तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में आयोजित की गई थी। परीक्षा 2 फरवरी 2014 को हुई थी और प्रदेश के 17 मंडलों में पशुधन प्रसार अधिकारी के कुल 1,198 पदों के लिए चयन प्रक्रिया चलाई गई थी। इन पदों पर भर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन से जुड़ी सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से की जानी थी। हालांकि, बाद में चयन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आईं। कुछ अभ्यर्थियों ने भर्ती के नियमों के पालन और परिणाम तैयार करने के तरीके पर सवाल उठाए, जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई।
जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया के दौरान निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया और अभ्यर्थियों की ओएमआर उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की व्यवस्था में बदलाव किया गया। नियमों के मुताबिक, अंतिम चयन में मंडलीय चयन समितियों की भूमिका निर्धारित थी। लेकिन जांच एजेंसी का आरोप है कि मूल्यांकन को केंद्रीकृत करते हुए रायबरेली स्थित फिरोज गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी को उत्तर पुस्तिकाओं की जांच का काम सौंपा गया। इस संस्थान के चयन और अनुबंध की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे।
EOW की जांच में कथित तौर पर यह भी पाया गया कि मूल्यांकन का काम सौंपने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ था। जांच एजेंसी ने अनुबंध और मूल्यांकन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। आरोप है कि इस व्यवस्था से चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित हुई और कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की संभावना बनी। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।
भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद वर्ष 2017 में विशेष जांच दल (SIT) को मामले की जांच सौंपी गई थी। इसके बाद 2019 में प्राथमिकी दर्ज की गई। जांच के दौरान कई अधिकारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल हुई। मामले में कुल 28 लोगों के नाम सामने आने की जानकारी दी गई है, जिनमें से 25 के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। जांच एजेंसी ने भर्ती से जुड़े रिकॉर्ड, मूल्यांकन प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका का परीक्षण किया है।
योगेश कुमार उस समय पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव थे। जांच एजेंसी ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान लिए गए प्रशासनिक फैसलों और उनके कथित प्रभाव की जांच की। EOW के महानिदेशक जय नारायण सिंह के अनुसार, योगेश कुमार को लखनऊ के गोमती नगर से गिरफ्तार किया गया है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है; आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।
इस मामले में तत्कालीन पशुधन विकास मंत्री राजकिशोर सिंह की भूमिका भी जांच के दायरे में रही है। रिपोर्टों के अनुसार, उनके खिलाफ अभियोजन की अनुमति से संबंधित फाइल शासन स्तर पर लंबित बताई गई है। फिलहाल उनके विरुद्ध आगे की कार्रवाई का निर्णय संबंधित कानूनी मंजूरी और जांच की स्थिति पर निर्भर करेगा। इस मामले ने उस समय भर्ती प्रक्रिया की निगरानी करने वाले अधिकारियों और चयन व्यवस्था की जिम्मेदारियों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
सरकारी भर्ती युवाओं के लिए रोजगार पाने का महत्वपूर्ण माध्यम होती है। ऐसे में चयन प्रक्रिया में कथित हेरफेर की जांच केवल संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इससे उन अभ्यर्थियों के भरोसे पर भी असर पड़ता है जो वर्षों तक परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। भर्ती में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नियम, निष्पक्ष मूल्यांकन और शिकायतों की समय पर जांच जरूरी मानी जाती है।
योगेश कुमार की गिरफ्तारी इस लंबे समय से चल रहे मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। अब आगे की कानूनी कार्यवाही और जांच से यह स्पष्ट होगा कि भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के लिए किन लोगों की जिम्मेदारी तय होती है। मामले का अंतिम निष्कर्ष अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और न्यायिक निर्णय पर निर्भर करेगा।
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