Last updated: October 2nd, 2026 at 01:44 pm

उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश के बाद कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। लखनऊ और आसपास के इलाकों में गोमती तथा सई नदी के बढ़ते पानी ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। लखनऊ के फैजुल्लागंज इलाके में बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है, जबकि सई नदी के किनारे बसे गांवों में खेतों में पानी पहुंचने से फसलों को नुकसान हुआ है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के साथ राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं।
लखनऊ के फैजुल्लागंज क्षेत्र में गोमती नदी का पानी कई रिहायशी इलाकों तक पहुंच गया है। रिपोर्ट के अनुसार 200 से अधिक घरों के आसपास जलभराव की स्थिति बनी हुई है। कई परिवारों को आने-जाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को लगातार सतर्क रहने के लिए कहा गया है।
जिला प्रशासन ने फैजुल्लागंज में तीन राहत शिविर और कंट्रोल रूम बनाए हैं। प्रभावित लोगों तक भोजन, दवाएं और दूसरी जरूरी सामग्री पहुंचाई जा रही है। आवाजाही के लिए 15 नावें तैनात की गई हैं। प्रशासन की ओर से मेडिकल कैंप भी लगाए गए हैं, ताकि जलभराव वाले इलाकों में लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने के लिए प्रशासन ने सोशल मीडिया मॉनिटरिंग भी शुरू की है। कंट्रोल रूम में विशेषज्ञ हर घंटे करीब 100 सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी खंगाल रहे हैं। इनमें फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। सामने आने वाली शिकायतों और सूचनाओं की पुष्टि के बाद संबंधित टीम को मौके पर भेजने की व्यवस्था की गई है।
प्रशासन ने विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं वाले परिवारों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य आपात स्थिति में ऐसे लोगों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना है। साथ ही नगर निगम की टीमें प्रभावित इलाकों में नावों के जरिए फॉगिंग और एंटी-लार्वा दवा का छिड़काव कर रही हैं, ताकि जलभराव के कारण मच्छरों से होने वाली समस्याओं को नियंत्रित किया जा सके।
लखनऊ के सरोजनीनगर क्षेत्र में सई नदी का पानी भी बढ़ा है। ग्राम बनी और आसपास के क्षेत्रों में नदी का पानी फिलहाल कृषि भूमि तक पहुंचा है। कुछ निचले इलाकों में पानी घरों तक भी पहुंचने की सूचना है। नगवा नाला सई नदी से जुड़ा होने के कारण नदी का जलस्तर बढ़ने पर बंथरा और रहीमनगर पड़ियाना के कुछ हिस्सों में भी पानी पहुंचा है। प्रभावित परिवारों के लिए आंगनबाड़ी केंद्र और पंचायत भवन में राहत शिविर तैयार किए गए हैं।
मोहनलालगंज क्षेत्र में भी सई नदी के बढ़े जलस्तर से तीन दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ जैसे हालात बनने की जानकारी सामने आई है। नदी का पानी खेतों में पहुंचने से सैकड़ों बीघे धान की फसल जलमग्न हो गई है। किसानों के लिए यह स्थिति इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि कई जगह धान की फसल पकने की अवस्था में है। लंबे समय तक पानी जमा रहने पर फसल को नुकसान होने की आशंका है।
गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर का असर जौनपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में भी देखा गया है। बदलापुर क्षेत्र में 50 एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि जलमग्न होने की जानकारी सामने आई है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन लगातार बढ़ते पानी के कारण नदी किनारे के गांवों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ी हुई है। जौनपुर शहर के कुछ निचले इलाकों में भी पानी पहुंचने की सूचना है।
गोमती और सई के अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश में सरयू, राप्ती, रोहिन और अन्य नदियों के जलस्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर और बस्ती मंडल के कई इलाकों में बाढ़ का पानी रिहायशी क्षेत्रों और खेतों तक पहुंचा है। कुछ स्थानों पर सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए नावों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखना, राहत सामग्री उपलब्ध कराना और नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी करना है। जलस्तर कम होने के बाद प्रभावित खेतों और फसलों के नुकसान का सर्वे कराया जाएगा। इसके आधार पर किसानों को राहत उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
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