Last updated: October 13th, 2026 at 03:16 pm

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी और बहराइच जिलों में तेंदुए के हमलों से दो बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। दोनों घटनाएं सोमवार शाम की हैं, जबकि बच्चों के शव मंगलवार सुबह या घटना के कुछ समय बाद बरामद हुए। इन हादसों के बाद आसपास के गांवों में डर का माहौल है। वन विभाग ने प्रभावित इलाकों में गश्त और तलाशी अभियान तेज करने की बात कही है। लगातार सामने आ रहे हमलों ने ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा और वन्यजीवों की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
पहली घटना लखीमपुर खीरी जिले के पधुआ थाना क्षेत्र के बोझिया गांव में हुई। यहां सात वर्षीय सान्या सोमवार शाम करीब सात बजे अपने घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान तेंदुए ने उस पर हमला कर दिया और उसे जबड़ों में दबाकर पास के गन्ने के खेत की ओर ले गया। बच्ची के अचानक गायब होने से परिवार में अफरा-तफरी मच गई। पिता संपति गिरी और अन्य ग्रामीणों ने तेंदुए का पीछा करते हुए बच्ची की तलाश शुरू की, लेकिन अंधेरा होने और खेतों में तलाश करना मुश्किल होने के कारण उसे तत्काल खोजा नहीं जा सका।
सूचना मिलने के बाद पधुआ थाने की पुलिस टीम गांव पहुंची और तलाश अभियान चलाया। रात में अंधेरे और दुर्गम क्षेत्र की वजह से अभियान रोकना पड़ा। मंगलवार सुबह दोबारा तलाशी शुरू की गई। इस दौरान गन्ने के खेत से बच्ची का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। घटना की खबर फैलते ही गांव में शोक और भय का माहौल बन गया। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है।
यह इलाका दुधवा बफर जोन के धौरहरा वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है। वन विभाग के अधिकारियों ने तेंदुए की मौजूदगी को देखते हुए इलाके में निगरानी और गश्त बढ़ाने की बात कही है। ग्रामीणों को भी सतर्क रहने और बच्चों को अकेले घर से बाहर नहीं जाने देने की सलाह दी गई है।
दूसरी घटना बहराइच जिले के कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के ककरहा रेंज के अंतर्गत हुई। यहां सात वर्षीय रोहित की तेंदुए के हमले में मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक, सोमवार शाम करीब साढ़े सात बजे बच्चा घर के पास खेत की ओर गया था। इसी दौरान गन्ने के खेत में छिपे तेंदुए ने उस पर हमला कर दिया। बच्चे की चीख सुनकर परिजन और आसपास के ग्रामीण तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े।
लोगों को अपनी ओर आते देख तेंदुआ बच्चे को घसीटकर गन्ने के खेत में ले गया। ग्रामीणों ने खोजबीन की तो रोहित गंभीर हालत में मिला। परिजन उसे अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन इससे पहले ही उसकी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे गांव को झकझोर दिया है। परिवार के लिए यह बड़ा सदमा है, जबकि आसपास के लोग अपने बच्चों को लेकर चिंतित हैं।
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के अधिकारियों के अनुसार, पीड़ित परिवार को तत्काल 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। नियमों के तहत पांच लाख रुपये की अनुमन्य सहायता उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। वन विभाग ने तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने और जरूरत के अनुसार उसे पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने सहित अन्य कदम उठाने की बात कही है।
बहराइच के कतर्नियाघाट और आसपास के वन क्षेत्रों में तेंदुए के हमलों की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। हाल के महीनों में कई लोगों की जान जाने की खबरों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में काम करने, शाम के समय बाहर निकलने और बच्चों के खेलने जैसी सामान्य गतिविधियों के दौरान भी लोगों को सतर्क रहना पड़ रहा है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों के आसपास गन्ने जैसे ऊंची फसल वाले खेत तेंदुओं को छिपने का स्थान दे सकते हैं। ऐसे क्षेत्रों में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। ग्रामीणों को सलाह दी जाती है कि वे बच्चों को अकेले खेतों या झाड़ियों के पास न जाने दें, शाम और रात के समय समूह में आवाजाही करें तथा किसी वन्यजीव को देखने पर उसके करीब जाने या उसे घेरने की कोशिश न करें।
दोनों घटनाओं के बाद वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के सामने ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती है। प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ लोगों को जागरूक करना भी जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
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