Last updated: October 13th, 2026 at 03:14 pm

उत्तर प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले निजी कोचिंग संस्थानों पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार कोचिंग सेंटरों के संचालन, सुरक्षा, शिक्षकों की योग्यता और विद्यार्थियों से ली जाने वाली फीस को लेकर नए नियम लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 50 से अधिक विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले कोचिंग संस्थानों के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर संस्थानों को 50 हजार रुपये से लेकर 1.50 लाख रुपये तक जुर्माना देना पड़ सकता है।
13 अक्टूबर 2026 को सामने आई जानकारी के मुताबिक, सरकार ‘उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियमन अध्यादेश-2026’ लाने की तैयारी कर रही है। इसका उद्देश्य निजी कोचिंग संस्थानों को अधिक जवाबदेह बनाना और विद्यार्थियों को सुरक्षित तथा भरोसेमंद शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है। प्रस्तावित प्रावधानों में संस्थानों के पंजीकरण के साथ-साथ उनकी कार्यप्रणाली, सुविधाओं और शुल्क व्यवस्था पर भी निगरानी रखने की बात शामिल है।
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, जिन कोचिंग सेंटरों में 50 से अधिक विद्यार्थियों को दाखिला दिया जाता है, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत पंजीकरण कराना होगा। संस्थानों को अपने संचालन से संबंधित जरूरी जानकारी और निर्धारित मानकों के अनुपालन का विवरण देना पड़ सकता है। इसका मकसद ऐसे संस्थानों की पहचान सुनिश्चित करना है, जो बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं, लेकिन जरूरी सुविधाओं और प्रशासनिक नियमों का पालन नहीं करते।
कोचिंग संस्थानों में शिक्षकों की योग्यता को लेकर भी सख्ती प्रस्तावित है। जानकारी के मुताबिक, ऐसे संस्थानों में स्नातक से कम शैक्षणिक योग्यता वाले शिक्षकों को नियुक्त नहीं किया जा सकेगा। इससे विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता निर्धारित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इस प्रावधान का अंतिम स्वरूप आधिकारिक नियम जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
प्रस्तावित अध्यादेश में नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के लिए 50 हजार रुपये से लेकर 1.50 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। जुर्माने की अलग-अलग श्रेणियां, कार्रवाई की प्रक्रिया और नियम लागू होने की तारीख जैसे विवरणों की पुष्टि अंतिम अधिसूचना के बाद ही होगी। इसलिए फिलहाल इन प्रावधानों को प्रस्तावित व्यवस्था के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
सरकार कोचिंग सेंटरों में विद्यार्थियों को रैंक या अच्छे अंक दिलाने के भ्रामक वादों पर भी रोक लगाना चाहती है। कई विद्यार्थी और अभिभावक प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता की उम्मीद के साथ महंगी फीस देकर दाखिला लेते हैं। ऐसे में गलत दावों और भ्रामक प्रचार के जरिए विद्यार्थियों को आकर्षित करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई की व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इसके अतिरिक्त, विद्यार्थियों से ली जाने वाली फीस और पढ़ाई से संबंधित खर्चों में पारदर्शिता लाने पर भी जोर दिया जा रहा है। बीच में कोचिंग छोड़ने वाले विद्यार्थियों की फीस वापसी को लेकर भी प्रावधान प्रस्तावित हैं। यदि इन्हें अंतिम रूप में लागू किया जाता है, तो विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को फीस से जुड़े विवादों में राहत मिल सकती है।
कोचिंग संस्थानों को लेकर सरकार की सख्ती के पीछे विद्यार्थियों की सुरक्षा भी एक बड़ा कारण है। लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में कोचिंग संस्थान वाली इमारत में आग लगने की घटनाओं ने भवनों की सुरक्षा व्यवस्था, अग्निशमन उपकरणों और आपातकालीन निकास की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऐसी घटनाएं बताती हैं कि बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले संस्थानों में आग से बचाव के उपकरण, सुरक्षित निकास मार्ग, पर्याप्त जगह और जरूरी बुनियादी सुविधाएं होना कितना आवश्यक है।
यदि प्रस्तावित अध्यादेश लागू होता है, तो बड़े कोचिंग संस्थानों को पंजीकरण और अन्य निर्धारित मानकों का पालन करने के लिए अपनी व्यवस्था में बदलाव करना पड़ सकता है। विद्यार्थियों को भी दाखिला लेने से पहले संस्थान के पंजीकरण, शिक्षकों की योग्यता, फीस वापसी की शर्तों और सुरक्षा सुविधाओं की जानकारी जांचनी चाहिए।
प्रस्तावित नियमों के अंतिम स्वरूप और लागू होने की तारीख को लेकर आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करना होगा। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि किन संस्थानों पर कौन-कौन से प्रावधान लागू होंगे और उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई किस प्रक्रिया से की जाएगी।
![]()
Comments are off for this post.