Human Live Media

HomeNewsयूपी में भारी बारिश से खरीफ फसलों को बड़ा नुकसान, धान की फसल खेतों में गिरी; रबी की बुवाई पर भी असर की आशंका

यूपी में भारी बारिश से खरीफ फसलों को बड़ा नुकसान, धान की फसल खेतों में गिरी; रबी की बुवाई पर भी असर की आशंका

  उत्तर प्रदेश में पिछले तीन दिनों से हो रही भारी बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा
11cadb7d-3bae-422c-b500-34c180884dad_1790474963923

 

Table of Contents

    उत्तर प्रदेश में पिछले तीन दिनों से हो रही भारी बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य के कई हिस्सों में खेतों में खड़ी खरीफ फसलें प्रभावित हुई हैं। खासतौर पर तैयार हो रही धान की फसल तेज हवाओं के कारण खेतों में गिर गई है। लगातार बारिश के चलते कई खेतों में पानी भर गया है, जिससे फसल के सड़ने और दाने खराब होने का खतरा बढ़ गया है। इसके साथ ही आने वाले रबी सीजन की बुवाई में भी देरी की आशंका जताई जा रही है।

     

    बारिश का असर धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन, बाजरा और दूसरी खरीफ फसलों पर भी पड़ा है। जिन खेतों में फसल पकने की स्थिति में पहुंच चुकी थी, वहां तेज हवाओं से पौधे जमीन पर गिर गए। पानी में लंबे समय तक पड़े रहने से दानों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार खेतों में जलभराव बना रहा तो गिरे हुए धान में अंकुरण और सड़न की समस्या पैदा हो सकती है।

     

    अलीगढ़ में बारिश और तेज हवाओं के कारण कई ग्रामीण इलाकों में धान, बाजरा और ज्वार की फसल जमीन पर गिरने की जानकारी सामने आई है। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में कृषि विभाग की टीमें खेतों का निरीक्षण कर रही हैं और नुकसान की स्थिति दर्ज की जा रही है। किसानों ने बारिश के कारण फसल के उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ने की आशंका जताई है।

     

    गोरखपुर में भी लगातार बारिश और करीब 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवाओं ने खरीफ फसलों को प्रभावित किया है। जिले में धान का रकबा 1.44 लाख हेक्टेयर से अधिक है और कई इलाकों में अगेती धान की फसल गिरने की जानकारी मिली है। मक्का, मूंगफली, अरहर, ज्वार, बाजरा और तिल जैसी अन्य फसलों पर भी बारिश और तेज हवा का असर पड़ने की आशंका है।

     

    किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता खेतों में जमा पानी को लेकर है। कृषि विभाग की ओर से किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने और जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखने की सलाह दी गई है। खासतौर पर जिन खेतों में फसल गिर गई है, वहां पानी ज्यादा देर तक जमा रहने पर नुकसान बढ़ सकता है। इसलिए बारिश रुकने के बाद खेतों से पानी निकालना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

     

    पीलीभीत में भी बारिश से धान की फसल को काफी नुकसान होने की खबर है। किसान संगठनों के प्रारंभिक अनुमान के अनुसार जिले में कई इलाकों में धान के खेत प्रभावित हुए हैं। जिन खेतों में कटाई शुरू हो चुकी थी, वहां लगातार बारिश के कारण काम रुक गया है। खेतों में पानी भरने से तैयार फसल के खराब होने की आशंका भी बनी हुई है। अधिकारियों ने बारिश थमने के बाद फसल नुकसान का आकलन कराने की बात कही है।

     

    भारी बारिश का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं है। राज्य के 63 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है और कई इलाकों में जलभराव तथा बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। तेज बारिश और हवाओं के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में खड़ी फसलों के साथ कई मकानों को भी नुकसान पहुंचा है। प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन करने और जरूरतमंद परिवारों तक राहत पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

     

    किसानों के लिए एक और चुनौती रबी सीजन की तैयारी है। सामान्य तौर पर खरीफ फसल की कटाई के बाद किसान रबी फसलों के लिए खेत तैयार करना शुरू करते हैं। लेकिन यदि खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहा तो मिट्टी में पर्याप्त नमी कम होने और खेत सूखने में समय लग सकता है। इससे गेहूं, सरसों और दूसरी रबी फसलों की बुवाई प्रभावित होने की संभावना है।

     

    राज्य सरकार की ओर से प्रभावित किसानों को राहत देने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से फसल नुकसान का सर्वे कराने और पात्र किसानों को नियमों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने को कहा गया है। हालांकि वास्तविक नुकसान का आंकड़ा बारिश थमने और खेतों का विस्तृत निरीक्षण पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

     

    किसानों की सबसे बड़ी चिंता तैयार धान की फसल को बचाने और खेतों से पानी निकालने की है। मौसम में सुधार होने पर नुकसान का विस्तृत आकलन किया जाएगा। कृषि विभाग और जिला प्रशासन की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बारिश से राज्य में कुल कितने क्षेत्र की फसल प्रभावित हुई है और किसानों को कितनी आर्थिक क्षति हुई है।

    Loading

    Comments are off for this post.