Last updated: September 10th, 2026 at 03:29 pm

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ग्रामीण इलाकों में विकास कार्यों को गति देने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार ने आदर्श ग्राम योजना के तहत अब तक लंबित गांवों के विकास की योजना को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में शेष 5,973 गांवों का विलेज डेवलपमेंट प्लान तैयार कराने और उसे जिला स्तरीय समिति से एक महीने के भीतर मंजूर कराने को कहा है।
सरकार की ओर से जारी निर्देशों के मुताबिक आदर्श ग्राम योजना के तहत प्रदेश में कुल 12,382 गांवों का चयन किया गया है। इनमें से 6,409 गांवों के ड्राफ्ट विलेज डेवलपमेंट प्लान तैयार हो चुके हैं। वहीं 5,050 गांवों के प्लान अंतिम रूप से तैयार किए जा चुके हैं। अब शेष 5,973 गांवों के लिए विकास योजना तैयार कर उसे निर्धारित समय के भीतर मंजूरी दिलाने पर जोर दिया गया है।
समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने यह भी निर्देश दिया कि जिन 1,878 गांवों ने आदर्श ग्राम योजना के तहत 70 अंक हासिल कर लिए हैं, उन्हें तत्काल आदर्श ग्राम घोषित करने की प्रक्रिया पूरी की जाए। इसका उद्देश्य उन गांवों में उपलब्ध सुविधाओं और विकास के स्तर को योजना के निर्धारित मानकों के अनुरूप आगे बढ़ाना है।
विलेज डेवलपमेंट प्लान का मकसद किसी गांव में विकास की जरूरतों को व्यवस्थित तरीके से चिन्हित करना और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर प्राथमिकताएं तय करना है। उत्तर प्रदेश के पंचायतीराज विभाग के अनुसार ग्राम पंचायत विकास योजना का उद्देश्य सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत विकास को बढ़ावा देना, स्थानीय समुदाय को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करना तथा विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को समयसीमा का पालन करने को लेकर भी सख्त निर्देश दिए हैं। बैठक में कहा गया कि निर्धारित अवधि में लंबित मामलों का निस्तारण नहीं होने पर संबंधित मुख्य विकास अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। यदि एक महीने के भीतर लंबित कार्य समाप्त नहीं हुए तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि की कार्रवाई भी की जा सकती है।
बैठक में ग्रामीण विकास के अलावा कई अन्य मुद्दों की भी समीक्षा की गई। इनमें लंपी स्किन डिजीज की रोकथाम, संचारी रोग नियंत्रण, इन्फ्लुएंजा की स्थिति, बाढ़ राहत और बचाव कार्य तथा फार्मर रजिस्ट्री शामिल रहे। अधिकारियों को इन योजनाओं की भी नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए।
गांवों के विकास को लेकर सरकार की अन्य तैयारियां भी हाल के दिनों में सामने आई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की मरम्मत का अभियान अक्टूबर से शुरू करने की योजना बताई गई है। खासतौर पर पेयजल परियोजनाओं के लिए पाइपलाइन बिछाने के दौरान खोदी गई सड़कों को दोबारा ठीक करने पर ध्यान दिया जाएगा।
इसके अलावा सरकार ने उत्कृष्ट काम करने वाली ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री के 10 विशेष पुरस्कार शुरू किए हैं। इसके तहत चयनित ग्राम पंचायतों को 50-50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी। स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, महिला सहभागिता, जैविक खेती, स्थानीय आय बढ़ाने और सार्वजनिक सेवाओं जैसे क्षेत्रों में बेहतर काम करने वाली पंचायतें इस प्रक्रिया में शामिल हो सकती हैं। आवेदन की प्रक्रिया 15 से 30 सितंबर तक निर्धारित की गई है।
इन फैसलों को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को तेज करने के व्यापक प्रशासनिक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, किसी योजना या विकास कार्य को चुनावी रणनीति से जोड़ना राजनीतिक विश्लेषण का विषय है। आधिकारिक तौर पर फिलहाल मुख्य जोर लंबित ग्राम विकास योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और गांवों में विकास कार्यों की निगरानी मजबूत करने पर है।
अब अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती 5,973 गांवों के लिए विकास योजनाओं को तय समय में तैयार कर जिला स्तर पर मंजूरी दिलाने की होगी। आने वाले एक महीने में इन योजनाओं की प्रगति से यह स्पष्ट होगा कि प्रशासन निर्धारित समयसीमा के भीतर लंबित कार्यों को कितनी तेजी से पूरा कर पाता है।
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