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बिहार में बाढ़ का कहर, 14 जिलों में 43 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित; राहत और बचाव अभियान तेज

बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। राज्य के 14 जिलों में बाढ़ का असर पहुंच चुका
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बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। राज्य के 14 जिलों में बाढ़ का असर पहुंच चुका है और लाखों लोग इससे प्रभावित हैं। 10 सितंबर को सामने आई जानकारी के अनुसार प्रभावित आबादी का आंकड़ा 43.64 लाख तक पहुंच गया है। कई इलाकों में लोगों के घरों, खेतों और ग्रामीण सड़कों पर पानी जमा है, जबकि प्रशासन की ओर से राहत और बचाव अभियान जारी है।

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    बाढ़ से प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया और अरवल शामिल हैं। इन जिलों के निचले इलाकों में बाढ़ का प्रभाव ज्यादा दिखाई दे रहा है। इससे बड़ी संख्या में ग्रामीण आबादी के सामने भोजन, पीने के पानी, आवागमन और पशुओं के चारे जैसी समस्याएं पैदा हुई हैं।

     

    पटना जिले के ग्रामीण इलाकों में भी बाढ़ ने काफी नुकसान पहुंचाया है। कई कच्चे मकान और झोपड़ियां प्रभावित हुई हैं, जबकि खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की खबर है। कुछ लोगों को अपने घर छोड़कर ऊंचे स्थानों, सरकारी भवनों और राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। बाढ़ के कारण कई ग्रामीण सड़कों पर आवागमन भी प्रभावित हुआ है।

     

    भागलपुर और आसपास के इलाकों में भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। गंगा समेत कई नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी से निचले क्षेत्रों में पानी फैल गया है। भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर 9 सितंबर को 36.78 मीटर दर्ज किया गया, जो अगस्त 2021 में दर्ज 36.75 मीटर के पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर से ऊपर था।

     

    बाढ़ से ग्रामीण बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। उपलब्ध प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार सैकड़ों ग्रामीण सड़कें पानी में डूब गई हैं और कई सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं। कुछ छोटे बांधों के टूटने की भी जानकारी सामने आई है। इससे प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक ले जाने में प्रशासन के सामने अतिरिक्त चुनौती पैदा हुई है।

     

    लोगों तक भोजन और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए सामुदायिक रसोई और राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं। राहत एवं बचाव कार्यों में राज्य की आपदा प्रतिक्रिया टीमों के साथ एनडीआरएफ की टीमें भी लगाई गई हैं। प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य टीमों को भी सक्रिय रखा गया है।

     

    बाढ़ की स्थिति को केवल स्थानीय बारिश से जोड़ना भी पूरी तस्वीर नहीं बताता। हालिया विश्लेषण के अनुसार बिहार में जून से 8 सितंबर तक सामान्य से कम बारिश हुई थी, लेकिन गंगा और गंडक जैसी नदियों के जलस्तर और उनके असामान्य प्रवाह ने बाढ़ की स्थिति को गंभीर बनाने में भूमिका निभाई। इसलिए बाढ़ के कारणों को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों की जल स्थिति और नदी के प्रवाह को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

     

    प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, भोजन और पेयजल उपलब्ध कराने तथा सड़क और अन्य आवश्यक सेवाओं को बहाल रखने की है। कई इलाकों में जलस्तर में बढ़ोतरी की रफ्तार कम होने की जानकारी भी सामने आई है, लेकिन नदियों के कुछ स्थानों पर खतरे के निशान के ऊपर रहने के कारण प्रशासन अभी भी सतर्क है।

     

    बिहार में बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या लगातार बढ़ने के बीच आने वाले दिनों में जलस्तर और नदी के प्रवाह पर नजर रखना बेहद महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल सरकार और स्थानीय प्रशासन राहत कार्यों को जारी रखते हुए प्रभावित परिवारों तक जरूरी सहायता पहुंचाने में जुटे हैं।

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