
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बड़ी कार्रवाई की है। पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में गड़बड़ी सामने आने के बाद प्रदेश के सभी 75 जिलों में मतदाता पंजीकरण केंद्रों पर तैनात कंप्यूटर सहायकों की ECINET पोर्टल से जुड़ी लॉगिन आईडी निष्क्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं। इस फैसले से प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर काम कर रहे कुल 806 कंप्यूटर सहायकों की पोर्टल तक पहुंच बंद हो जाएगी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने शनिवार को सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने जिलों में मतदाता पंजीकरण केंद्रों पर तैनात कंप्यूटर सहायकों की लॉगिन आईडी तत्काल प्रभाव से बंद कराएं। संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) को भी इसकी पुष्टि करनी होगी। जिला निर्वाचन अधिकारियों को अपने जिलों की सभी विधानसभा सीटों पर कार्रवाई का सत्यापन करके मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को रिपोर्ट भेजने के लिए कहा गया है।
यह कदम पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी की जांच के बाद उठाया गया है। जांच में सामने आया कि 31 मई से 29 अगस्त 2026 के बीच ECINET पोर्टल पर 13,779 फॉर्म-8 दर्ज किए गए थे। इनमें से 10,470 फॉर्म स्वीकार कर लिए गए। फॉर्म-8 का इस्तेमाल मतदाता सूची में पहले से दर्ज जानकारी में सुधार करने या मतदाता के निवास स्थान में बदलाव दर्ज कराने के लिए किया जाता है।
जांच के दौरान इन आवेदनों से जुड़े जरूरी भौतिक फॉर्म और सहायक दस्तावेज उपलब्ध नहीं मिले। इससे यह सवाल उठा कि संबंधित मतदाताओं की जानकारी में बदलाव किस आधार पर किया गया। मामले में एक शिकायत यह भी थी कि एक मतदाता का EPIC नंबर वोटर लिस्ट में किसी दूसरे व्यक्ति की जानकारी के साथ दिखाई दे रहा था। EPIC नंबर मतदाता पहचान पत्र पर दर्ज विशिष्ट पहचान संख्या होती है।
इस मामले को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि मतदाता सूची में लोगों के नाम और विवरण में अनधिकृत बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। शिकायतों के बाद चुनाव आयोग ने 21 अक्टूबर को जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भी मामले की पड़ताल कराई।
एक नवंबर को इस मामले में कार्रवाई और आगे बढ़ी। चुनाव आयोग ने पीलीभीत के दो निर्वाचन अधिकारियों मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को निलंबित करने का निर्देश दिया। आयोग ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आरोपपत्र भेजने और अपनी पूर्व अनुमति के बिना उन्हें बहाल नहीं करने की बात भी कही। इसके अलावा, दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 198 जोड़ने का निर्देश दिया गया है। इस मामले में कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
पीलीभीत में कथित अनियमितताओं के बाद संबंधित आउटसोर्सिंग एजेंसी को आरोपी कंप्यूटर सहायक की सेवाएं समाप्त करने का निर्देश पहले ही दिया जा चुका है। राज्यव्यापी स्तर पर लॉगिन आईडी बंद करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कंप्यूटर सहायक अपने पुराने अधिकारों के जरिए मतदाता सूची में बदलाव न कर सकें। हालांकि, कंप्यूटर सहायकों को पूरी तरह हटाया नहीं गया है। वे पहले की तरह कार्यालयों में लिपिकीय कार्य करते रहेंगे, लेकिन ECINET पोर्टल पर मतदाता संबंधी गतिविधियां नहीं कर पाएंगे।
अब मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन से संबंधित फॉर्मों की प्रक्रिया में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होगी। अधिकारियों के अनुसार, हर आवेदन और बदलाव की जिम्मेदारी तय करने के लिए यह व्यवस्था लागू की जा रही है। इससे यह पता लगाना आसान होगा कि किसी मतदाता की जानकारी में बदलाव किस अधिकारी या कर्मचारी के माध्यम से हुआ।
निर्वाचन विभाग ने मतदाता सूची की जांच और सुधार की प्रक्रिया को भी तेज करने के निर्देश दिए हैं। पीलीभीत में विवादित प्रविष्टियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत ठीक करने की बात कही गई है। इसके लिए संबंधित मतदाताओं से आवश्यक फॉर्म और दस्तावेज प्राप्त किए जाएंगे, ताकि बिना वैध आवेदन के किसी की जानकारी में बदलाव न हो।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद से नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रक्रिया पर राजनीतिक दलों की निगाहें बनी हुई हैं। मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी सीधे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ी होती है।
चुनाव आयोग की कार्रवाई के बाद अब प्रदेश के सभी जिलों में कंप्यूटर सहायकों की लॉगिन आईडी निष्क्रिय करने और मतदाता सूची की जांच पर निगरानी बढ़ेगी। पीलीभीत मामले की जांच में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं, यह भी महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल आयोग का जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि मतदाता सूची में प्रत्येक बदलाव निर्धारित नियमों, आवश्यक दस्तावेजों और जवाबदेही के साथ किया जाए।
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