Last updated: October 25th, 2026 at 04:06 am

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को मतदान संपन्न हो गया। चुनाव में कुल 55.24 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। मतदान के दौरान प्रदेश के कई जिलों से राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी, झड़प और चुनावी अनियमितताओं के आरोप सामने आए। इन घटनाओं के बाद भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अब सभी उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों की नजर 27 अक्टूबर को होने वाली मतगणना पर टिकी है, जब चुनाव के नतीजे घोषित किए जाएंगे।
इन चुनावों में प्रदेश की पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटें शामिल थीं। कुल 72 जिलों में चुनावी प्रक्रिया संचालित की गई। निर्वाचन आंकड़ों के अनुसार, 14,81,310 मतदाता मतदान के लिए पंजीकृत थे। वोटिंग सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक बैलेट पेपर के माध्यम से कराई गई। चुनाव के लिए 2,697 मतदान केंद्र बनाए गए थे, जहां मतदानकर्मियों और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी।
मतदान के दौरान गोरखपुर, फतेहपुर और आगरा सहित कई जिलों में विवाद की खबरें सामने आईं। गोरखपुर में डीएवी डिग्री कॉलेज के मतदान केंद्र पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार डॉ. संजयन् त्रिपाठी की मौजूदगी के दौरान भाजपा और सपा समर्थकों के बीच कहासुनी हो गई। बताया गया कि उम्मीदवार के मीडिया से बातचीत करने को लेकर आपत्ति जताए जाने के बाद विवाद बढ़ा। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगाए।
फतेहपुर के विजयपुर ब्लॉक क्षेत्र में भी मतदान केंद्र के पास विवाद होने की सूचना मिली। समाजवादी पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया कि वहां जबरन मतदान कराने की कोशिश हुई और एक बूथ पर सीसीटीवी कैमरे बंद थे। हालांकि, पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने कहा कि स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया था और मतदान जारी रहा। पुलिस ने मामले की जांच करने और शिकायतों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही।
आगरा में समाजवादी पार्टी के समर्थकों ने मतदान केंद्र पर बूथ कैप्चरिंग और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के आरोप लगाए। वाराणसी में भी सपा उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा के मतदान केंद्र पहुंचने के दौरान विवाद की खबर सामने आई। सीतापुर में एक सपा मतदान एजेंट ने आरोप लगाया कि एक महिला मतदाता का बैलेट पेपर छीन लिया गया और उसे मतदान केंद्र से बाहर जाने के लिए मजबूर किया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मतदान के दौरान सामने आई घटनाओं को लेकर निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर भाजपा समर्थकों ने मतदान को प्रभावित करने की कोशिश की और शिकायतों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई। दूसरी ओर, भाजपा ने चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत होने का भरोसा जताया। हालांकि, विभिन्न पक्षों के आरोपों को अंतिम सत्य मानने से पहले आधिकारिक जांच और उपलब्ध साक्ष्यों का इंतजार करना जरूरी है।
इस चुनाव में भाजपा और सपा के बीच मुकाबला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दल अपनी संगठनात्मक ताकत दिखाना चाहते हैं। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों में मतदाताओं की संख्या सामान्य विधानसभा चुनावों की तुलना में कम होती है, लेकिन यहां शिक्षकों, स्नातकों और पेशेवर समूहों के बीच उम्मीदवारों की पकड़ अहम भूमिका निभाती है।
समाजवादी पार्टी ने कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, जो पहले भाजपा से जुड़े रहे हैं। इससे कई सीटों पर मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। वहीं, भाजपा अपने मौजूदा प्रतिनिधित्व को बनाए रखने और अन्य सीटों पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है। निर्दलीय और अन्य दलों के उम्मीदवारों की मौजूदगी ने भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित किया है।
इन चुनावों में शिक्षा व्यवस्था, रोजगार, शिक्षकों की सेवा संबंधी समस्याएं और स्थानीय विकास जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रहे। परिणामों से यह पता चलेगा कि इन मुद्दों पर उम्मीदवारों को कितना समर्थन मिला। हालांकि, विधान परिषद के इन सीमित निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों को सीधे 2027 के विधानसभा चुनाव का परिणाम मानना उचित नहीं होगा, क्योंकि दोनों चुनावों का मतदाता वर्ग और चुनावी परिस्थितियां अलग हैं।
मतदान पूरा होने के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। 27 अक्टूबर को होने वाली मतगणना से यह स्पष्ट होगा कि 11 सीटों में से किन उम्मीदवारों को जीत मिली और विधान परिषद में विभिन्न दलों की स्थिति पर इसका क्या असर पड़ा।
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