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लखनऊ कांग्रेस मुख्यालय में हंगामे पर बड़ा एक्शन, पांच सदस्यीय जांच समिति गठित; एक सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट

  उत्तर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ के पदभार ग्रहण कार्यक्रम से पहले हुए हंगामे का
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    उत्तर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ के पदभार ग्रहण कार्यक्रम से पहले हुए हंगामे का मामला अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गया है। लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं के दो गुटों के बीच हुई नोकझोंक, धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने की घटना के बाद कांग्रेस ने जांच शुरू कर दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। समिति को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। रिपोर्ट के आधार पर पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता के मामले में आगे की कार्रवाई किए जाने की संभावना है।

     

    यह विवाद उस समय सामने आया, जब उत्तर प्रदेश कांग्रेस संगठन में नेतृत्व परिवर्तन के बाद आराधना मिश्रा मोना को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालनी थी। कार्यक्रम में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के बीच अचानक माहौल तनावपूर्ण हो गया। देखते ही देखते कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी बढ़ गई और मामला धक्का-मुक्की तक पहुंच गया। घटनास्थल से सामने आए वीडियो में कार्यकर्ताओं के बीच अफरा-तफरी दिखाई दी। कुछ रिपोर्टों में जूते-चप्पल फेंके जाने की बात भी सामने आई।

     

    इस घटना ने प्रदेश कांग्रेस के भीतर चल रहे संगठनात्मक मतभेदों को फिर चर्चा में ला दिया है। पार्टी कार्यालय में हुई इस घटना को लेकर राजनीतिक हलकों में भी सवाल उठ रहे हैं कि नेतृत्व परिवर्तन के समय संगठन के भीतर ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई। कांग्रेस के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पार्टी आगामी राजनीतिक चुनौतियों के बीच संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की कोशिश कर रही है।

     

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, विवाद के दौरान निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के समर्थकों और दूसरे गुट के कार्यकर्ताओं के बीच तनाव बढ़ा। कांग्रेस की महिला नेता ममता चौधरी ने आरोप लगाया कि उनके साथ आई महिला कार्यकर्ताओं के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई। हालांकि, घटना के सभी पहलुओं और अलग-अलग पक्षों के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पार्टी ने इसी उद्देश्य से समिति का गठन किया है, ताकि पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर जिम्मेदारी तय की जा सके।

     

    कांग्रेस की ओर से गठित पांच सदस्यीय समिति का नेतृत्व बृजलाल खाबरी को सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है। समिति को घटना से जुड़े तथ्यों, संबंधित नेताओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका तथा विवाद की परिस्थितियों की जांच करनी है। एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने की समयसीमा तय की गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में किन लोगों की भूमिका सामने आती है और पार्टी नेतृत्व इस मामले में क्या कदम उठाता है।

     

    इस घटनाक्रम के दौरान आराधना मिश्रा मोना के पदभार ग्रहण कार्यक्रम पर भी असर पड़ा। पार्टी नेतृत्व के सामने चुनौती है कि प्रदेश संगठन में चल रहे मतभेदों को दूर किया जाए और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित किया जाए। राजनीतिक दलों में नेतृत्व परिवर्तन के दौरान समर्थकों के बीच मतभेद सामने आ सकते हैं, लेकिन पार्टी कार्यालय में सार्वजनिक रूप से इस तरह का विवाद संगठन की छवि पर असर डालता है।

     

    उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए संगठनात्मक बदलावों और नए नेतृत्व के सहारे आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है। ऐसे समय में लखनऊ मुख्यालय में हुई घटना ने पार्टी के अंदर अनुशासन और आपसी तालमेल को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच समिति की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि विवाद किन परिस्थितियों में शुरू हुआ और इसे रोकने में कहां चूक हुई।

     

    कांग्रेस नेतृत्व की नजर जांच प्रक्रिया पर है। एक सप्ताह में रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है। पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती केवल दोषियों की पहचान करना नहीं, बल्कि संगठन के भीतर विश्वास बहाल करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना भी होगा।

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