Last updated: July 1st, 2026 at 04:25 pm

भारत और पाकिस्तान की 117 प्रमुख हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ को एक संयुक्त खुला पत्र लिखकर दोनों देशों के बीच बातचीत और सामान्य कूटनीतिक संबंध बहाल करने की अपील की है। इस पहल में दोनों देशों के पूर्व राजनयिकों, राजनीतिक नेताओं, शिक्षाविदों और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया है। पत्र में कहा गया है कि दक्षिण एशिया में स्थायी शांति, विकास और क्षेत्रीय सहयोग के लिए दोनों देशों के बीच निरंतर संवाद आवश्यक है।
यह पहल सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस के माध्यम से सामने आई है। पत्र पर भारत की ओर से 61 और पाकिस्तान की ओर से 56 हस्ताक्षरकर्ताओं ने हस्ताक्षर किए हैं। भारतीय हस्ताक्षरकर्ताओं में कई प्रमुख राजनीतिक और सार्वजनिक हस्तियां शामिल हैं, जबकि पाकिस्तान की ओर से भी पूर्व मंत्री, राजनयिक और शिक्षाविद इस पहल का हिस्सा बने हैं।
पत्र में दोनों प्रधानमंत्रियों से आग्रह किया गया है कि वे लंबे समय से रुके हुए द्विपक्षीय संवाद को फिर से शुरू करें। इसके साथ ही नई दिल्ली और इस्लामाबाद में उच्चायुक्तों की नियुक्ति, सामान्य वीज़ा सेवाओं की बहाली, हवाई संपर्क और सीमापार व्यापार को फिर से शुरू करने जैसे कदम उठाने का सुझाव भी दिया गया है। हस्ताक्षरकर्ताओं का कहना है कि लगातार तनाव का सबसे अधिक असर दोनों देशों की आम जनता, विशेषकर युवाओं पर पड़ता है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान दुनिया की लगभग पाँचवीं आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच शांति और सहयोग केवल द्विपक्षीय हित का विषय नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता और आर्थिक विकास से जुड़ा हुआ है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि मतभेदों का समाधान केवल संवाद और कूटनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव है।
इस पहल के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा शुरू हो गई है। कुछ नेताओं ने इसे सकारात्मक नागरिक पहल बताया है, जबकि अन्य का मानना है कि भारत-पाकिस्तान संबंधों में किसी भी प्रगति के लिए सीमा पार आतंकवाद और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान भी आवश्यक है। फिलहाल भारत सरकार की ओर से इस खुले पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।
विदेश नीति के जानकारों का कहना है कि भारत और पाकिस्तान के संबंध पिछले कुछ वर्षों से कई मुद्दों के कारण तनावपूर्ण रहे हैं। ऐसे समय में नागरिक समाज की ओर से संवाद बहाल करने की अपील को एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि किसी भी औपचारिक वार्ता की दिशा दोनों देशों की सरकारों के राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी आकलन पर निर्भर करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस प्रकार के खुले पत्र प्रत्यक्ष रूप से सरकारी नीति तय नहीं करते, लेकिन वे यह संकेत अवश्य देते हैं कि समाज के एक वर्ग की ओर से शांति और संवाद की इच्छा व्यक्त की जा रही है। भविष्य में दोनों देशों के संबंध किस दिशा में आगे बढ़ेंगे, यह दोनों सरकारों के निर्णयों और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
117 भारतीय और पाकिस्तानी हस्तियों की यह संयुक्त अपील भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर नई चर्चा का विषय बन गई है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देशों की सरकारें इस पहल पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं और क्या भविष्य में द्विपक्षीय संवाद को आगे बढ़ाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं।
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