Last updated: June 26th, 2026 at 05:16 pm

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था और दलित उत्पीड़न से जुड़े मामलों को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऐसी घटनाओं पर तत्काल और निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए ताकि लोगों का कानून व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।
मायावती ने अपने बयान में कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार और सुरक्षा की गारंटी देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि कमजोर और वंचित वर्गों से जुड़े मामलों में समय पर कार्रवाई नहीं होती, तो इससे जनता का भरोसा प्रभावित होता है। उन्होंने सरकार से ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की।
बसपा प्रमुख ने कहा कि दलित, पिछड़े और अन्य कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से संवेदनशील मामलों में तेजी से कार्रवाई करने और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की अपील की।
उत्तर प्रदेश सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार का कहना है कि किसी भी अपराध के मामले में दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाती है और किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाता।
भाजपा नेताओं ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था पहले की तुलना में मजबूत हुई है और अपराध पर नियंत्रण के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। उनका दावा है कि सरकार अपराधियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कानून-व्यवस्था और सामाजिक न्याय उत्तर प्रदेश की राजनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। चुनावी माहौल के करीब आते ही विभिन्न राजनीतिक दल इन विषयों को और अधिक प्रमुखता से उठाने लगते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार दलित समाज उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए इस वर्ग से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक दलों की सक्रियता स्वाभाविक मानी जाती है। बसपा लगातार सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों को अपनी राजनीति का प्रमुख आधार बताती रही है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि आने वाले समय में कानून-व्यवस्था, सामाजिक न्याय और जनसुरक्षा जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है। जनता भी इन विषयों पर सरकार और विपक्ष दोनों की भूमिका पर नजर बनाए हुए है।
फिलहाल मायावती के इस बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में कानून-व्यवस्था और दलित सुरक्षा के मुद्दे को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस विषय पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है।
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