Last updated: June 28th, 2026 at 01:23 pm

बिहार की राजनीति में भ्रष्टाचार और टेंडर व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है। रविवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए और विभिन्न मामलों को लेकर जवाब मांगा।
तेजस्वी यादव ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात करती है, लेकिन कई मामलों में बड़े अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों पर कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच की प्रक्रिया अक्सर छोटे स्तर के कर्मचारियों तक ही सीमित रह जाती है, जबकि बड़े नामों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।
उन्होंने राज्य की आर्थिक स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए दावा किया कि बिहार की आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो रही है, जबकि कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है। उनके अनुसार, सरकार कई योजनाओं और कर्मचारियों के भुगतान के लिए संसाधनों की कमी का हवाला देती है, लेकिन भ्रष्टाचार के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित नहीं करती।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तेजस्वी यादव ने टेंडर प्रक्रिया से जुड़े एक मामले का उल्लेख करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में कई विभागों की निविदा प्रक्रिया प्रभावित हुई। उन्होंने यह भी पूछा कि जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बावजूद संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
आरजेडी नेता ने सृजन घोटाला, कैग रिपोर्ट और अन्य वित्तीय मामलों का जिक्र करते हुए सरकार से पारदर्शिता बरतने की मांग की। उन्होंने कहा कि जनता अब हर महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट जवाब चाहती है।
इस दौरान तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी तीखा हमला बोला और उनके खिलाफ राजनीतिक टिप्पणी की। साथ ही उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि यदि आरोप गलत हैं तो सरकार तथ्यों के साथ उनका जवाब दे।
फिलहाल सरकार की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। वहीं, टेंडर व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बिहार की राजनीति में बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
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