Last updated: July 1st, 2026 at 06:38 pm

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) और अल्पसंख्यक अधिकारों के मुद्दे पर केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि किसी भी कानून का उद्देश्य संविधान की मूल भावना और सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की विविधता और विभिन्न समुदायों की परंपराओं को ध्यान में रखते हुए व्यापक संवाद के बाद ही किसी बड़े कानूनी बदलाव पर आगे बढ़ना चाहिए।
ओवैसी ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था संविधान पर आधारित है और संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करता है। उनका कहना था कि किसी भी नीति या कानून को लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों से चर्चा और सुझाव लेना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि ऐसे विषयों पर राजनीतिक सहमति बनाने का प्रयास किया जाए।
एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक प्रगति पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि विकास की योजनाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक समान रूप से पहुंचना चाहिए। उनके अनुसार समावेशी विकास ही देश की प्रगति का आधार हो सकता है।
उन्होंने संसद और सार्वजनिक मंचों पर भी संविधान, नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाने की बात कही। उनका कहना था कि विपक्ष की जिम्मेदारी केवल सरकार की आलोचना करना नहीं, बल्कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर रचनात्मक सुझाव देना भी है।
दूसरी ओर केंद्र सरकार का कहना है कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना और संविधान के नीति-निर्देशक सिद्धांतों की दिशा में आगे बढ़ना है। सरकार का कहना है कि इस विषय पर विभिन्न स्तरों पर विचार-विमर्श और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे कदम उठाए जा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समान नागरिक संहिता लंबे समय से भारतीय राजनीति और कानून से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय रहा है। इस पर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। इसलिए जब भी यह मुद्दा सामने आता है, राजनीतिक बहस तेज हो जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे संवेदनशील विषयों पर व्यापक चर्चा और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाता है। विभिन्न पक्षों की राय सुनने और कानूनी पहलुओं पर विचार करने से बेहतर नीति निर्माण में मदद मिलती है।
असदुद्दीन ओवैसी के इस बयान के बाद समान नागरिक संहिता और अल्पसंख्यक अधिकारों का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में आ गया है। आने वाले समय में इस विषय पर सरकार, विपक्ष और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है। यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान बनाए रख सकता है।
![]()
Comments are off for this post.