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भारतीय शेयर बाजार लगातार चौथे सप्ताह बढ़त के साथ बंद, विदेशी निवेश और वैश्विक संकेतों से बढ़ा भरोसा

भारतीय शेयर बाजार ने लगातार चौथे सप्ताह मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। सप्ताह के दौरान निवेशकों का रुझान सकारात्मक
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भारतीय शेयर बाजार ने लगातार चौथे सप्ताह मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। सप्ताह के दौरान निवेशकों का रुझान सकारात्मक बना रहा और प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स तथा निफ्टी 50 दोनों ने साप्ताहिक आधार पर बढ़त दर्ज की। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की खरीदारी, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, वैश्विक आर्थिक माहौल में सुधार और भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण ने बाजार को मजबूती प्रदान की।

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    सप्ताह के दौरान बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, ऑटोमोबाइल, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और पूंजीगत वस्तुओं (Capital Goods) से जुड़े शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की रुचि बढ़ी, जिससे प्रमुख सूचकांकों को समर्थन मिला। मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला, हालांकि कुछ सत्रों में मुनाफावसूली के कारण सीमित उतार-चढ़ाव भी दर्ज किया गया।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से भारत जैसे आयातक देशों को राहत मिली है। भारत अपनी तेल आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट का सकारात्मक प्रभाव महंगाई, चालू खाते के घाटे और कॉर्पोरेट लागत पर पड़ सकता है। यही कारण है कि निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भी भारतीय बाजार में निवेश बढ़ाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत की विकास दर अपेक्षाकृत बेहतर रहने की उम्मीद है। मजबूत घरेलू मांग, सरकारी पूंजीगत व्यय, बुनियादी ढांचे में निवेश और कॉर्पोरेट आय में संभावित सुधार जैसे कारक विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं।

    घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी बाजार को मजबूत समर्थन दिया। म्यूचुअल फंडों में लगातार निवेश, व्यवस्थित निवेश योजना (SIP) के माध्यम से बढ़ता घरेलू निवेश और खुदरा निवेशकों की सक्रिय भागीदारी ने बाजार की मजबूती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पिछले कुछ वर्षों में घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी भारतीय शेयर बाजार की प्रमुख विशेषता बनकर उभरी है।

    विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले सप्ताहों में निवेशकों की नजर कई महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतकों पर रहेगी। इनमें कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय परिणाम, खुदरा महंगाई के आंकड़े, औद्योगिक उत्पादन, वैश्विक ब्याज दरों से जुड़े संकेत और विदेशी निवेश का रुख प्रमुख होंगे। यदि ये संकेत सकारात्मक रहते हैं, तो बाजार में तेजी का रुझान आगे भी जारी रह सकता है।

    हालांकि विश्लेषकों ने निवेशकों को सतर्क रहने की भी सलाह दी है। उनका कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों में अचानक बदलाव, डॉलर की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अस्थिरता जैसे कारक भारतीय बाजार को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए निवेशकों को केवल अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय दीर्घकालिक निवेश रणनीति अपनानी चाहिए।

    भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद, बढ़ता बुनियादी ढांचा निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार और विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन जैसी नीतियों को बाजार की मजबूती के प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आर्थिक सुधारों की गति बनी रहती है और वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार आने वाले महीनों में भी निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रह सकता है।

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