Last updated: July 5th, 2026 at 06:44 am

देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण और चरणबद्ध प्रक्रिया के बाद लागू किया गया है। सरकार का कहना है कि अब तक हुए शोध और परीक्षणों में E20 ईंधन से वाहनों को किसी प्रकार के गंभीर नुकसान का प्रमाण नहीं मिला है।
दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की पूर्व सीएमडी वर्तिका शुक्ला ने बताया कि वर्ष 2013-14 में पेट्रोल में केवल 1.5 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता था, जबकि भारत ने दिसंबर 2025 तक तय समय से पहले 20 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य हासिल कर लिया।
कार्यक्रम में मारुति सुजुकी, टोयोटा किर्लोस्कर, बजाज ऑटो, टीवीएस, हुंडई और हीरो मोटोकॉर्प सहित कई प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। कंपनियों के अधिकारियों ने कहा कि E20 ईंधन की विस्तृत टेस्टिंग के दौरान कोई बड़ी तकनीकी समस्या सामने नहीं आई। हालांकि, 2023 से पहले निर्मित कुछ पेट्रोल वाहनों के लिए निर्माता कंपनियों की सलाह का पालन करना आवश्यक हो सकता है।
सरकार ने यह भी बताया कि एथेनॉल आधारित ईंधन का उपयोग अब उच्च प्रदर्शन वाली मोटरस्पोर्ट्स, जैसे फॉर्मूला वन, में भी किया जा रहा है। E20 ईंधन को BS-VI उत्सर्जन मानकों के अनुरूप बताया गया है और इसका उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन में कमी लाकर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।
हालांकि, कुछ वाहन मालिकों ने E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से माइलेज में कमी, इंजन पार्ट्स के जल्दी खराब होने और रखरखाव खर्च बढ़ने की शिकायतें की हैं। इस पर सरकार का कहना है कि माइलेज में हल्का अंतर संभव है, लेकिन इंजन की कार्यक्षमता पर इसका कोई गंभीर नकारात्मक प्रभाव साबित नहीं हुआ है।
सरकार के अनुसार, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) समेत कई संस्थानों ने E20 ईंधन का परीक्षण किया है। विशेषज्ञों का दावा है कि इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है, किसानों को लाभ मिला है और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है।
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