Last updated: July 5th, 2026 at 03:22 pm

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि आने वाले वर्षों में भारत के लगभग 500 शहर देश की आर्थिक वृद्धि के नए केंद्र (Economic Hubs) बनकर उभरेंगे। उन्होंने कहा कि भारत का तेजी से बढ़ता मध्यम वर्ग, बढ़ती घरेलू खपत और टियर-2 तथा टियर-3 शहरों का विकास देश की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा। यह बात उन्होंने फ्रांस में आयोजित प्रतिष्ठित आर्थिक सम्मेलन Rencontres Économiques d’Aix-en-Provence में कही।
वित्त मंत्री ने कहा कि वर्तमान में भारत की लगभग 31 प्रतिशत आबादी मध्यम वर्ग में शामिल है और यह वर्ग हर वर्ष लगातार विस्तार कर रहा है। उनके अनुसार, भारत में उपभोग आधारित आर्थिक मॉडल देश की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में देश के कुल उपभोक्ता खर्च का लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा मध्यम वर्ग और उच्च-मध्यम वर्ग से आने की संभावना है।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत का आर्थिक विकास अब केवल दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार की विभिन्न नीतियों के कारण छोटे और मध्यम शहरों में भी उद्योग, सेवाएं, डिजिटल कारोबार और स्टार्टअप तेजी से विकसित हो रहे हैं। यही शहर भविष्य में नए निवेश, रोजगार और उद्यमिता के प्रमुख केंद्र बनेंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार वित्तीय समावेशन, डिजिटल भुगतान, बुनियादी ढांचे के विकास, प्रधानमंत्री आवास योजना, बिना गारंटी वाले ऋण और कर सुधार जैसे कदमों के माध्यम से मध्यम वर्ग और छोटे शहरों की आर्थिक क्षमता को मजबूत कर रही है। उनका कहना था कि इन सुधारों का उद्देश्य केवल विकास दर बढ़ाना नहीं, बल्कि विकास का लाभ देश के अधिक से अधिक क्षेत्रों तक पहुंचाना है।
वित्त मंत्री ने डिजिटल अर्थव्यवस्था को भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि यूपीआई, डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन सरकारी सेवाओं के विस्तार ने छोटे शहरों और कस्बों में भी आर्थिक गतिविधियों को तेज किया है। इससे स्थानीय व्यापारियों, छोटे उद्योगों और स्टार्टअप को नए अवसर मिल रहे हैं तथा औपचारिक अर्थव्यवस्था का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत के 500 शहर वास्तव में मजबूत आर्थिक केंद्र बनते हैं, तो देश में क्षेत्रीय असमानता कम हो सकती है। इससे महानगरों पर जनसंख्या और संसाधनों का दबाव घटेगा, जबकि छोटे शहरों में रोजगार, निवेश और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी। इसके साथ ही स्थानीय उद्योगों और सेवा क्षेत्र को भी बड़ा बाजार उपलब्ध होगा।
विश्लेषकों का कहना है कि भारत की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि काफी हद तक घरेलू मांग पर आधारित है। ऐसे में यदि मध्यम वर्ग की आय और क्रय शक्ति लगातार बढ़ती है, तो ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट, शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, पर्यटन और उपभोक्ता वस्तुओं जैसे क्षेत्रों में भी तेजी देखने को मिल सकती है। यही कारण है कि सरकार छोटे शहरों में बुनियादी ढांचे और निवेश को प्राथमिकता दे रही है।
वित्त मंत्री के इस बयान को भारत की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। यदि सरकार की योजनाएं तय समय पर लागू होती हैं और निजी निवेश भी अपेक्षित गति से बढ़ता है, तो आने वाले वर्षों में देश के सैकड़ों शहर नए आर्थिक विकास केंद्र के रूप में उभर सकते हैं। इससे भारत के “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को भी महत्वपूर्ण मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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