Last updated: July 6th, 2026 at 12:29 pm

बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव के उस बयान पर तीखा पलटवार किया, जिसमें तेजस्वी ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री बनने की सलाह दी थी। चिराग पासवान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “प्रधानमंत्री पद की कोई वैकेंसी नहीं है” और देश का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में सुरक्षित है।
चिराग पासवान ने कहा कि विपक्ष के पास जनता से जुड़े मुद्दों पर ठोस एजेंडा नहीं है, इसलिए वह इस तरह के राजनीतिक बयान देकर सुर्खियां बटोरने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) पूरी तरह एकजुट है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री पद को लेकर किसी तरह की अटकलों का कोई आधार नहीं है।
इससे पहले तेजस्वी यादव ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा था कि यदि नीतीश कुमार प्रधानमंत्री बनने की इच्छा रखते हैं तो उन्हें प्रयास करना चाहिए। उनके इस बयान को बिहार की राजनीति में नई बहस के रूप में देखा गया। हालांकि तेजस्वी ने इसे राजनीतिक टिप्पणी बताया और कहा कि उनका उद्देश्य राज्य की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर सवाल उठाना था।
चिराग पासवान ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि जनता विकास, रोजगार, बुनियादी ढांचे और सुशासन जैसे मुद्दों पर चर्चा चाहती है, जबकि विपक्ष केवल राजनीतिक बयानबाज़ी में व्यस्त है। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार का ध्यान विकास परियोजनाओं को गति देने और लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने पर केंद्रित है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार विधानसभा चुनावों से पहले इस तरह की बयानबाज़ी आने वाले समय में और तेज हो सकती है। राज्य में सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी महागठबंधन दोनों ही अपने-अपने राजनीतिक संदेश को मतदाताओं तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में शीर्ष नेताओं के बयान चुनावी माहौल को और गर्म कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि चिराग पासवान हाल के महीनों में राष्ट्रीय राजनीति में अधिक सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। वे लगातार एनडीए के समर्थन में बयान दे रहे हैं और बिहार के साथ-साथ राष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपनी स्पष्ट राय रख रहे हैं। दूसरी ओर तेजस्वी यादव विपक्ष के प्रमुख चेहरे के रूप में सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने का प्रयास कर रहे हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, प्रधानमंत्री पद को लेकर हुई यह बयानबाज़ी भले ही प्रतीकात्मक हो, लेकिन इससे बिहार की राजनीति में एनडीए और विपक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा स्पष्ट दिखाई देती है। आने वाले महीनों में चुनावी तैयारियों के साथ इस तरह के राजनीतिक हमले और जवाबी हमले और तेज होने की संभावना है।
चिराग पासवान और तेजस्वी यादव के बीच हुई यह बयानबाज़ी बिहार की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। राजनीतिक दल इसे अपने-अपने तरीके से पेश कर रहे हैं, जबकि आम जनता की नजर इस बात पर रहेगी कि चुनावी अभियान के दौरान विकास, रोजगार और शासन जैसे वास्तविक मुद्दों को कितना महत्व दिया जाता है।
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