Last updated: July 7th, 2026 at 06:59 am

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए अलग निर्वाचक मंडल की व्यवस्था लागू करने की वकालत की है। पार्टी की राज्य परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि डॉ. भीमराव आंबेडकर का मूल प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया होता, तो आज दलित समाज की सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति कहीं अधिक मजबूत होती।
मांझी ने कहा कि आजादी के दशकों बाद भी अनुसूचित जातियों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। उनका कहना था कि मौजूदा चुनावी व्यवस्था में आरक्षित सीटों पर सभी वर्गों के मतदान के कारण दलित समुदाय के निर्वाचित प्रतिनिधियों पर अन्य प्रभावशाली वर्गों का दबाव बना रहता है।
उन्होंने पूना समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय अलग निर्वाचक मंडल के बजाय आरक्षित सीटों पर सभी मतदाताओं को मतदान का अधिकार देने की व्यवस्था लागू की गई थी। मांझी का दावा है कि यदि अलग निर्वाचक मंडल की व्यवस्था होती, तो अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय का राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक सशक्तिकरण अधिक प्रभावी होता।
बैठक के दौरान उन्होंने आरक्षण के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा कि कुछ नेता स्वयं को आरक्षण का सबसे बड़ा समर्थक बताने की कोशिश करते हैं, जबकि वास्तविक संरक्षण संवैधानिक व्यवस्था और सरकार की नीतियों से मिलता है। उन्होंने विश्वास जताया कि मौजूदा सरकार के रहते आरक्षण व्यवस्था से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी।
अपने संबोधन में मांझी ने बिहार सरकार में मंत्री और अपने पुत्र संतोष कुमार सुमन को भी सार्वजनिक जीवन में अधिक सक्रिय रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को जनता के बीच लगातार संवाद बनाए रखना चाहिए और अपनी बात खुलकर रखनी चाहिए।
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