Last updated: July 8th, 2026 at 03:57 am

बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपने प्रत्याशी के नाम का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने युवा नेता अभिषेक कुमार ‘बंटी’ को मैदान में उतारते हुए चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। उम्मीदवार की घोषणा के साथ ही भाजपा ने चुनावी अभियान को भी तेज कर दिया है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने सोशल मीडिया के माध्यम से अभिषेक कुमार ‘बंटी’ को शुभकामनाएं देते हुए उन्हें पार्टी का समर्पित और जमीनी कार्यकर्ता बताया। उन्होंने कहा कि अभिषेक ने बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है और उन्हें विश्वास है कि बांकीपुर की जनता उन्हें भी सेवा का अवसर देगी।
अभिषेक कुमार ‘बंटी’ पटना के आनंदपुरी क्षेत्र के निवासी हैं और लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक कार्यों से जुड़े रहे हैं। वे भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) पटना महानगर के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा मंडल अध्यक्ष, मंडल मंत्री और महामंत्री जैसे कई अहम दायित्व भी निभा चुके हैं। संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका और स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ को देखते हुए पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है।
राजनीतिक गलियारों में अभिषेक कुमार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का करीबी माना जाता है। पार्टी ने एक युवा चेहरे को टिकट देकर स्पष्ट संकेत दिया है कि वह संगठन के सक्रिय कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। जानकारी के अनुसार, अभिषेक कुमार 9 जुलाई को अपना नामांकन दाखिल करेंगे, जिसमें नितिन नबीन के भी मौजूद रहने की संभावना है।
बांकीपुर सीट पर मुकाबला अब त्रिकोणीय होता नजर आ रहा है। जन सुराज की ओर से प्रशांत किशोर, राष्ट्रीय जनता दल की ओर से रेखा गुप्ता पहले ही चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में भाजपा के उम्मीदवार की घोषणा के बाद चुनावी समीकरण और रोचक हो गए हैं।
उम्मीदवार चयन से पहले भाजपा में कई नामों पर चर्चा चल रही थी। नील रतन घोष, अजय आलोक, रणवीर नंदन और आशीष सिंह जैसे नेताओं के नाम संभावित उम्मीदवारों में शामिल बताए जा रहे थे। हालांकि अंततः पार्टी ने युवा नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए अभिषेक कुमार ‘बंटी’ को टिकट दिया।
बांकीपुर विधानसभा सीट बिहार की सबसे महत्वपूर्ण शहरी सीटों में मानी जाती है। ऐसे में इस उपचुनाव को सभी प्रमुख दल प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देख रहे हैं। उम्मीदवारों की घोषणा के बाद अब राजनीतिक दल जनसंपर्क और चुनाव प्रचार को लेकर अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं।
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