Last updated: July 9th, 2026 at 11:12 am

भारत और अफगानिस्तान के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अफगानिस्तान के कार्यवाहक कृषि मंत्री मौलवी अताउल्लाह ओमारी से मुलाकात की। यह बैठक नई दिल्ली में आयोजित हुई, जिसमें कृषि, बागवानी, पशुपालन, खाद्य सुरक्षा और कृषि अनुसंधान जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने कृषि क्षेत्र में तकनीकी सहयोग बढ़ाने और किसानों के हित में नई साझेदारियों की संभावनाओं पर विचार किया।
बैठक के दौरान भारत ने कृषि अनुसंधान, आधुनिक खेती की तकनीक, सिंचाई प्रबंधन, बीज विकास और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई। अफगान प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थानों के अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता की सराहना करते हुए कहा कि इससे अफगानिस्तान के कृषि क्षेत्र को मजबूती मिल सकती है। दोनों देशों ने कृषि वैज्ञानिकों के बीच संवाद और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा की।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत हमेशा से अफगान जनता के साथ विकास और मानवीय सहयोग के लिए प्रतिबद्ध रहा है। उन्होंने कृषि को दोनों देशों के बीच सहयोग का महत्वपूर्ण क्षेत्र बताते हुए कहा कि किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादकता सुधारने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी साझेदारी आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपने अनुभव और संसाधनों को साझा करने के लिए तैयार है।
बैठक में पशुपालन, डेयरी विकास, फल एवं सब्जी उत्पादन, कोल्ड चेन और कृषि प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। दोनों देशों ने कृषि शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूत बनाने पर सहमति जताई ताकि आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ किसानों तक पहुंच सके। अधिकारियों के अनुसार भविष्य में संयुक्त कार्य योजनाओं पर आगे बातचीत जारी रहेगी।
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक केवल कृषि सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की क्षेत्रीय कूटनीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत लंबे समय से अफगान जनता के लिए विकास परियोजनाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और मानवीय सहायता के माध्यम से सहयोग करता रहा है। कृषि क्षेत्र में बढ़ता सहयोग दोनों देशों के बीच विश्वास और व्यावहारिक साझेदारी को और मजबूत कर सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है और आधुनिक तकनीक, सिंचाई सुविधाओं तथा बेहतर बीजों के उपयोग से वहां कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। भारत इस क्षेत्र में अपने अनुभव के आधार पर महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी संबंधों को भी नई मजबूती मिलने की संभावना है।
दोनों देशों ने कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए नियमित संवाद जारी रखने पर सहमति व्यक्त की है। अधिकारियों का मानना है कि इस बैठक से कृषि, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में नई साझेदारियों का मार्ग प्रशस्त होगा। आने वाले समय में दोनों देशों के विशेषज्ञों के बीच और भी तकनीकी बैठकों के आयोजन की संभावना है, जिससे द्विपक्षीय सहयोग को और विस्तार मिल सकेगा।
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