Last updated: July 9th, 2026 at 11:14 am

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। यह बैठक भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों नेताओं के बीच रक्षा सहयोग, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, मुक्त समुद्री व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स), स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और निवेश सहित कई अहम विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में यह बैठक दोनों देशों के रिश्तों को नई मजबूती दे सकती है।
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, भारत और ऑस्ट्रेलिया पिछले कुछ वर्षों में अपने संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले गए हैं। रक्षा अभ्यास, समुद्री सुरक्षा, व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग लगातार बढ़ा है। आज की बैठक में इन क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं की समीक्षा के साथ-साथ नए सहयोग पर भी चर्चा होगी। दोनों देशों का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को और मजबूत करना है।
बैठक में महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति भी प्रमुख एजेंडा रहेगी। भारत इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आवश्यक खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहता है, जबकि ऑस्ट्रेलिया इस क्षेत्र में दुनिया के प्रमुख उत्पादकों में शामिल है। दोनों देश दीर्घकालिक साझेदारी के माध्यम से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाने पर जोर देंगे।
रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर विशेष चर्चा होगी। दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा प्रौद्योगिकी, खुफिया जानकारी साझा करने और समुद्री निगरानी को और मजबूत बनाने पर विचार किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक चुनौतियों को देखते हुए भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा सहयोग पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
आर्थिक सहयोग भी बैठक का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा। दोनों देश मुक्त व्यापार समझौते को और प्रभावी बनाने, निवेश बढ़ाने, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप, शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्रों में नई संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। भारतीय उद्योगों के लिए ऑस्ट्रेलिया एक महत्वपूर्ण बाजार बनता जा रहा है, जबकि ऑस्ट्रेलियाई कंपनियां भी भारत में निवेश के अवसर तलाश रही हैं।
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि क्वाड (Quad) और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में लोकतांत्रिक देशों के सहयोग को भी नई दिशा दे सकती है। भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों मुक्त, समावेशी और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के पक्षधर हैं तथा क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
बैठक के बाद दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों या संयुक्त घोषणाओं की भी संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह वार्ता भारत की “एक्ट ईस्ट” नीति और ऑस्ट्रेलिया के साथ बढ़ते रणनीतिक संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकती है। दोनों नेताओं की बातचीत पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर रहेगी क्योंकि इसके परिणाम हिंद-प्रशांत क्षेत्र की भविष्य की रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
![]()
Comments are off for this post.