Last updated: July 9th, 2026 at 12:52 pm
रेलवे में निजीकरण की बढ़ती प्रक्रिया के विरोध में राष्ट्रीय कुली मोर्चा ने बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। संगठन ने निर्णय लिया है कि 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र के दौरान देशभर से कुली प्रतिनिधि दिल्ली पहुंचकर केंद्र सरकार और विभिन्न सांसदों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वे अपनी मांगों से जुड़ा ज्ञापन भी सौंपेंगे।
राष्ट्रीय कुली मोर्चा की वर्चुअल बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में शामिल प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि रेलवे स्टेशनों पर सामान ढुलाई से जुड़े कार्य धीरे-धीरे निजी कंपनियों और अन्य निजी व्यवस्थाओं को सौंपे जा रहे हैं, जिससे अधिकृत कुलियों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ रहा है।
संगठन ने मांग की है कि रेलवे में कुलियों के समायोजन की ठोस व्यवस्था की जाए और उन्हें सामाजिक सुरक्षा का लाभ दिया जाए। साथ ही रेलवे स्टेशनों पर सामान ढुलाई से जुड़े कार्य कुलियों की सहकारी समितियों को सौंपे जाएं, ताकि उनके रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
राष्ट्रीय कुली मोर्चा का कहना है कि वर्तमान में बैटरी कार, ट्रॉली सेवा और “माई कुली” ऐप जैसी सुविधाओं का संचालन निजी स्तर पर किया जा रहा है। संगठन चाहता है कि इन सेवाओं का संचालन भी कुलियों की सहकारी समितियों के माध्यम से कराया जाए, जिससे पारंपरिक कुलियों को रोजगार के नए अवसर मिल सकें।
बैठक में यह मुद्दा भी उठाया गया कि कुलियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को लेकर पिछले वर्ष कराई गई जांच रिपोर्ट अब तक संसद में पेश नहीं की गई है। मोर्चा ने मांग की है कि आगामी मानसून सत्र में इस रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखा जाए और उसके आधार पर आवश्यक निर्णय लिए जाएं।
इसके अलावा संगठन ने अपने राष्ट्रीय समन्वयक राम सुरेश यादव के खिलाफ कथित फर्जी और बिना हस्ताक्षर वाली शिकायत के आधार पर हुई कार्रवाई पर भी नाराजगी जताई। मोर्चा ने कहा कि इस मामले को लेकर भी रेल मंत्रालय को ज्ञापन सौंपकर विरोध दर्ज कराया जाएगा। राष्ट्रीय कुली मोर्चा का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आने वाले समय में आंदोलन को और व्यापक बनाया जा सकता है।
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