Last updated: July 11th, 2026 at 11:13 am

बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव ने मतदान से पहले ही नया मोड़ ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा ने नामांकन दाखिल करने के मात्र एक दिन बाद अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। उनके इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। भाजपा ने तुरंत नया उम्मीदवार घोषित करते हुए भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के नेता नीरज कुमार सिन्हा को चुनाव मैदान में उतार दिया। इस घटनाक्रम ने बांकीपुर उपचुनाव को राज्य की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल कर दिया है।
अभिषेक कुमार सिन्हा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने पूरी तरह पारिवारिक कारणों से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है। उन्होंने भाजपा के केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी ने उन पर भरोसा जताया, जिसके लिए वे हमेशा आभारी रहेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका निर्णय व्यक्तिगत कारणों से लिया गया है और इसका पार्टी की रणनीति से कोई संबंध नहीं है। हालांकि उनके अचानक पीछे हटने से राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
भाजपा ने उम्मीदवार बदलने में देरी नहीं की और नीरज कुमार सिन्हा को आधिकारिक प्रत्याशी घोषित कर दिया। पार्टी नेताओं ने कहा कि संगठन पूरी तरह एकजुट है और बांकीपुर सीट पर जीत सुनिश्चित करने के लिए सभी कार्यकर्ता नए उम्मीदवार के समर्थन में पूरी ताकत से चुनाव प्रचार करेंगे। भाजपा का कहना है कि उम्मीदवार परिवर्तन से चुनावी रणनीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा और पार्टी पहले की तरह मजबूत स्थिति में है।
इस घटनाक्रम के बाद जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनाव से ठीक पहले उम्मीदवार बदलना इस बात का संकेत है कि भाजपा इस सीट को लेकर दबाव महसूस कर रही है। प्रशांत किशोर ने कहा कि कोई भी विधानसभा क्षेत्र किसी राजनीतिक दल की स्थायी जागीर नहीं होता और अंतिम फैसला जनता करती है। उनके इस बयान के बाद बांकीपुर उपचुनाव की राजनीतिक गर्माहट और बढ़ गई है।
वहीं विपक्षी दलों ने भी भाजपा के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि सब कुछ सामान्य था तो नामांकन दाखिल होने के अगले ही दिन उम्मीदवार बदलने की नौबत क्यों आई। हालांकि भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह पूरी तरह व्यक्तिगत कारणों से लिया गया निर्णय है और इसे अनावश्यक राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा का पारंपरिक गढ़ रही है। इस सीट पर वर्षों से भाजपा का मजबूत जनाधार रहा है, लेकिन इस बार जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने से मुकाबला काफी रोचक हो गया है। यही वजह है कि पूरे बिहार की नजर इस उपचुनाव पर टिकी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव का परिणाम आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों के मनोबल पर भी असर डाल सकता है।
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि मतगणना 3 अगस्त को की जाएगी। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि अभी शेष है, इसलिए आने वाले दिनों में चुनावी समीकरणों में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने-अपने प्रचार अभियान तेज कर दिए हैं और मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
बांकीपुर उपचुनाव बिहार की राजनीति का सबसे चर्चित विषय बना हुआ है। भाजपा के उम्मीदवार बदलने के फैसले ने चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। अब सभी की निगाहें नए उम्मीदवार की चुनावी रणनीति, विपक्ष की प्रतिक्रिया और मतदाताओं के रुख पर टिकी हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि बिहार की बदलती राजनीतिक दिशा का भी संकेत साबित हो सकता है।
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