Last updated: July 11th, 2026 at 11:15 am

बिहार की राजनीति में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर और जनता दल (यूनाइटेड) के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। जेडीयू ने प्रशांत किशोर के हालिया बयानों और राजनीतिक गतिविधियों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन पर राजनीति को मुद्दों के बजाय प्रचार का माध्यम बनाने का आरोप लगाया। पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार ने कहा कि यदि प्रशांत किशोर का यही रवैया जारी रहा तो वे भविष्य में “राजनीतिक ड्रामेबाजी के उस्ताद” के रूप में पहचाने जाएंगे। यह बयान ऐसे समय आया है जब बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर बिहार की राजनीति पहले से ही गर्म है।
जेडीयू ने आरोप लगाया कि प्रशांत किशोर लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं जिनका उद्देश्य केवल मीडिया का ध्यान आकर्षित करना है। पार्टी का कहना है कि जन सुराज को जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए वास्तविक मुद्दों पर काम करना चाहिए, न कि केवल राजनीतिक बयानबाजी करनी चाहिए। जेडीयू नेताओं ने कहा कि बिहार की जनता विकास, रोजगार, शिक्षा और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर जवाब चाहती है, जबकि प्रशांत किशोर केवल राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा के उम्मीदवार बदलने के बाद प्रशांत किशोर ने एनडीए पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि चुनाव से ठीक पहले उम्मीदवार बदलना इस बात का संकेत है कि सत्तारूढ़ गठबंधन दबाव में है। इस टिप्पणी के बाद जेडीयू ने मोर्चा संभालते हुए प्रशांत किशोर के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया और कहा कि उम्मीदवार बदलना भाजपा का आंतरिक निर्णय है, जिसे अनावश्यक रूप से राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।
जेडीयू ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए विपक्षी दलों पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष विकास के मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय केवल राजनीतिक विवाद खड़े करने में लगा हुआ है। जेडीयू का दावा है कि एनडीए सरकार राज्य में विकास कार्यों को प्राथमिकता दे रही है और जनता आगामी चुनावों में भी विकास के आधार पर ही फैसला करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में विधानसभा चुनावों से पहले सभी दल अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। जन सुराज पार्टी पहली बार बड़े स्तर पर चुनावी मैदान में उतर रही है, जबकि एनडीए और महागठबंधन अपनी-अपनी रणनीति को धार देने में लगे हैं। ऐसे में नेताओं के बीच बयानबाजी का दौर आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशांत किशोर की राजनीतिक शैली और जेडीयू की प्रतिक्रिया दोनों ही चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश का हिस्सा हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, बांकीपुर उपचुनाव केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह बिहार की बदलती राजनीतिक दिशा का संकेत भी माना जा रहा है। यही कारण है कि इस चुनाव से जुड़े हर बयान और हर फैसले पर सभी दलों की नजर बनी हुई है। जेडीयू, भाजपा, राजद और जन सुराज के बीच बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा ने चुनावी माहौल को और रोचक बना दिया है।
जेडीयू और प्रशांत किशोर के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे चुनाव प्रचार तेज होगा, वैसे-वैसे राजनीतिक बयानबाजी भी और तीखी होने की संभावना है। बिहार की जनता अब यह देख रही है कि राजनीतिक दल केवल एक-दूसरे पर आरोप लगाने तक सीमित रहते हैं या फिर विकास और जनहित के मुद्दों पर भी ठोस एजेंडा लेकर जनता के बीच जाते हैं।
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