Last updated: July 11th, 2026 at 11:29 am

उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले विपक्षी दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर चर्चाएं तेज होती जा रही हैं। कांग्रेस ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन की स्थिति में सम्मानजनक और बराबरी के आधार पर सीट साझेदारी की मांग उठाई है। कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि पार्टी अब राज्य में पहले से अधिक मजबूत संगठन के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है और गठबंधन होने पर कांग्रेस को उसकी राजनीतिक ताकत के अनुरूप सम्मान मिलना चाहिए।
राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य भाजपा को चुनौती देने के लिए विपक्षी एकजुटता को मजबूत करना है, लेकिन गठबंधन केवल तभी सफल हो सकता है जब सभी सहयोगी दल एक-दूसरे का सम्मान करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस केवल प्रतीकात्मक भूमिका निभाने के बजाय उत्तर प्रदेश में सक्रिय और प्रभावी भागीदारी चाहती है। उनका कहना था कि पिछले कुछ वर्षों में पार्टी ने राज्य में संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार काम किया है और कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बढ़ा है।
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच हुए तालमेल का लाभ दोनों दलों को मिला था। इसी अनुभव के आधार पर विधानसभा चुनाव के लिए भी समय रहते रणनीति तय करने की जरूरत है। हालांकि पार्टी ने यह भी संकेत दिया कि सीटों का बंटवारा दोनों दलों की वास्तविक राजनीतिक स्थिति और संगठनात्मक क्षमता को ध्यान में रखकर होना चाहिए।
समाजवादी पार्टी की ओर से इस बयान पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पार्टी फिलहाल संगठन विस्तार, पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) अभियान और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को मजबूत करने में जुटी हुई है। सपा नेतृत्व का मानना है कि चुनावी रणनीति पर अंतिम फैसला उचित समय पर लिया जाएगा। पार्टी फिलहाल प्रदेशभर में जनसंपर्क अभियान और संगठनात्मक बैठकों के जरिए अपनी चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ा रही है।
भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के इस बयान को विपक्ष की अंदरूनी खींचतान का प्रमाण बताया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष अभी से सीटों के बंटवारे को लेकर उलझा हुआ है, जबकि भाजपा सरकार विकास, निवेश, रोजगार और बुनियादी ढांचे के कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। पार्टी का दावा है कि जनता विकास के आधार पर ही आगामी चुनाव में फैसला करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर सीट बंटवारा विपक्ष के लिए आसान नहीं होगा। समाजवादी पार्टी राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी है, जबकि कांग्रेस भी पिछले कुछ समय से अपने संगठन को मजबूत करने का प्रयास कर रही है। ऐसे में दोनों दलों के बीच कई दौर की बातचीत होने की संभावना है। यदि समय रहते सहमति नहीं बनती, तो इसका असर विपक्ष की चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी कारण सभी प्रमुख दल अभी से अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। भाजपा जहां संगठन और सरकार की उपलब्धियों के आधार पर चुनावी तैयारी कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी और कांग्रेस विपक्षी एकता को मजबूत करने की कोशिश में हैं। आने वाले महीनों में सीट बंटवारे को लेकर होने वाली बातचीत पर पूरे राजनीतिक जगत की नजर रहेगी।
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