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पटना हाई कोर्ट की टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी, यौन अपराध मामलों में न्यायिक संवेदनशीलता पर दिए अहम संकेत

यौन अपराध से जुड़े मामलों में अदालतों की टिप्पणियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया
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यौन अपराध से जुड़े मामलों में अदालतों की टिप्पणियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पटना हाई कोर्ट के एक हालिया फैसले का उल्लेख होने पर कहा कि ऐसे मामलों में न्यायिक दृष्टिकोण कानून की मंशा और संवेदनशीलता के अनुरूप होना चाहिए। अदालत ने संकेत दिया कि इस मुद्दे पर विस्तृत आदेश जारी किया जाएगा।

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    सुनवाई के दौरान उठा पटना हाई कोर्ट का मामला

    सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने पटना हाई कोर्ट के उस फैसले का मुद्दा उठाया, जिसमें आरोपी को दुष्कर्म के प्रयास के आरोप से बरी कर दिया गया था। उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले दिए गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद इस तरह की टिप्पणियां सामने आना चिंता का विषय है। वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फूलका ने भी इस पर सहमति जताई।

    CJI ने क्या कहा?

    मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कई बार पर्याप्त कानूनी शोध और अध्ययन के अभाव में इस तरह के आदेश सामने आ जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मुद्दे पर विस्तृत आदेश पारित करेगा ताकि भविष्य में ऐसे मामलों में न्यायिक दृष्टिकोण अधिक स्पष्ट और संवेदनशील हो।

    क्या है पूरा मामला?

    यह मामला बिहार के बांका जिले का है। अभियोजन के अनुसार, एक युवती अपने पिता के साथ फोटो खिंचवाने स्टूडियो गई थी, जहां स्टूडियो संचालक पर उसके साथ अभद्र व्यवहार करने और दुष्कर्म के प्रयास का आरोप लगाया गया। निचली अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी।

    हालांकि, आरोपी की अपील पर पटना हाई कोर्ट ने सबूतों को पर्याप्त नहीं मानते हुए निचली अदालत का फैसला पलट दिया और आरोपी को बरी कर दिया। हाई कोर्ट का कहना था कि अभियोजन पक्ष दुष्कर्म के प्रयास का आरोप संदेह से परे साबित नहीं कर सका।

    इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले का भी हुआ जिक्र

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उस विवादित इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले का भी संदर्भ लिया, जिसे शीर्ष अदालत पहले ही रद्द कर चुकी है। उसी मामले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी को यौन अपराधों की सुनवाई में न्यायिक संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने का निर्देश दिया था। अब अदालत ने दोहराया है कि ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया पीड़ित-केंद्रित और कानून की भावना के अनुरूप होनी चाहिए।

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