Last updated: July 15th, 2026 at 12:01 pm

जनता दल (यूनाइटेड) के प्रदेश कार्यालय के बाहर बुधवार को बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए पूर्व महासचिव छोटू सिंह को दोबारा पार्टी में शामिल करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्षों तक पार्टी की सेवा करने वाले नेता के खिलाफ की गई कार्रवाई पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
छह साल के लिए किए गए हैं निष्कासित
जदयू ने हाल ही में पूर्व महासचिव छोटू सिंह को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया था। प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई। इसके साथ ही उन्हें नागरिक परिषद के उपाध्यक्ष पद से भी हटा दिया गया।
कार्यकर्ताओं ने फैसले पर जताई नाराजगी
प्रदर्शन कर रहे समर्थकों का कहना था कि छोटू सिंह लंबे समय से पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं और संगठन को मजबूत करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ऐसे में उन्हें पार्टी से बाहर करना उचित नहीं है और नेतृत्व को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।
नई प्रदेश कमेटी को लेकर बढ़ा विवाद
जानकारी के अनुसार, हाल ही में गठित जदयू की नई प्रदेश कार्यकारिणी में छोटू सिंह को जगह नहीं मिलने के बाद उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की थी। इसी सिलसिले में वह अपने समर्थकों के साथ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार से मिलने भी पहुंचे थे। हालांकि मुलाकात नहीं हो सकी, जिसके बाद पार्टी कार्यालय में विवाद की स्थिति बन गई। पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की।
नई टीम के गठन का उद्देश्य संगठन विस्तार
जदयू की नई प्रदेश टीम में 12 उपाध्यक्ष, 38 महासचिव और 74 सचिव नियुक्त किए गए हैं। इसके अलावा विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार को एक बार फिर मुख्य प्रवक्ता बनाया गया है। पार्टी का कहना है कि नई टीम का गठन संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत और सक्रिय बनाने के उद्देश्य से किया गया है।
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