Last updated: July 15th, 2026 at 12:06 pm

तमिलनाडु स्थित भारत के सबसे बड़े कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़े संवेदनशील दस्तावेजों के कथित तौर पर लीक होने का मामला सामने आया है। दावा किया गया है कि एक हैकर समूह ने प्लांट से संबंधित हजारों फाइलों की जानकारी सार्वजनिक की है। हालांकि, लीक हुए सभी दस्तावेजों की प्रामाणिकता की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।
क्या-क्या जानकारी होने का दावा?
रिपोर्टों के मुताबिक, कथित रूप से लीक हुए डेटा में प्लांट के कुछ हिस्सों के ब्लूप्रिंट, सप्लायर संबंधी दस्तावेज, निरीक्षण और बैठक के रिकॉर्ड, उपकरणों की समीक्षा रिपोर्ट तथा बीमा से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं। बताया जा रहा है कि करीब 19,000 संवेदनशील फाइलें इस डेटा का हिस्सा हैं।
रिलायंस ग्रुप ने सेंधमारी की पुष्टि की
रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस ग्रुप ने स्वीकार किया है कि उसके डेटा में आंशिक साइबर सेंधमारी हुई है। कंपनी ने बताया कि संबंधित डेटा एक थर्ड पार्टी डेटा सेंटर सेवा प्रदाता योट्टा के सर्वर पर होस्ट किया गया था। कंपनी ने इस घटना की जानकारी भारत सरकार को दे दी है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि कौन-सा डेटा प्रभावित हुआ है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने जताई चिंता
परमाणु सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संवेदनशील तकनीकी जानकारी गलत हाथों में पहुंचती है, तो इससे सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। हालांकि, अभी तक किसी सरकारी एजेंसी ने यह पुष्टि नहीं की है कि इस कथित डेटा लीक से परमाणु संयंत्र की परिचालन सुरक्षा पर कोई सीधा प्रभाव पड़ा है।
हैकर समूह ने किया दावा
दावा किया गया है कि World Leaks नामक हैकर समूह ने इस डेटा को सार्वजनिक किया है। यह समूह कथित तौर पर कंपनियों के डेटा तक अवैध पहुंच बनाकर फिरौती मांगने के लिए जाना जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, इससे पहले भी यह कई बड़ी कंपनियों को निशाना बना चुका है।
जांच और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है। लीक हुए दस्तावेजों की प्रामाणिकता और घटना के वास्तविक प्रभाव को लेकर संबंधित एजेंसियों की आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
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