Last updated: July 16th, 2026 at 12:50 pm

बिहार कांग्रेस द्वारा संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया ‘सृजन साथी’ अभियान अब राज्य की राजनीति के साथ-साथ पार्टी के भीतर भी चर्चा का विषय बन गया है। इस अभियान के तहत डिजिटल माध्यम से नए सदस्यों को जोड़ने और संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की पहल की गई है, लेकिन इसके संचालन के तरीके को लेकर पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि यह अभियान अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की संगठनात्मक सुधार योजना का हिस्सा है और इसका उद्देश्य पार्टी को आधुनिक, पारदर्शी तथा जमीनी स्तर पर अधिक मजबूत बनाना है।
बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी (BPCC) ने इस अभियान की शुरुआत इस उद्देश्य से की है कि राज्य के प्रत्येक बूथ तक पार्टी की सक्रिय उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके। अभियान के तहत मोबाइल एप्लिकेशन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नए सदस्यों का पंजीकरण किया जा रहा है। पार्टी का दावा है कि इस प्रक्रिया से सदस्यता अभियान अधिक पारदर्शी होगा, डेटा व्यवस्थित रहेगा और युवा वर्ग को संगठन से जोड़ने में आसानी होगी। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बदलते समय में डिजिटल माध्यमों का उपयोग संगठन विस्तार के लिए आवश्यक हो गया है।
हालांकि, अभियान शुरू होने के बाद पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इसकी प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सदस्यता अभियान और संगठनात्मक पदों के चयन को एक-दूसरे से जोड़ने के कारण कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। कुछ नेताओं का यह भी कहना है कि संगठन में जिम्मेदारियां केवल सदस्यता संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि लंबे समय से पार्टी के लिए किए गए कार्य, अनुभव और संगठनात्मक योगदान को ध्यान में रखकर दी जानी चाहिए। इस मुद्दे को लेकर कई नेताओं ने कांग्रेस हाईकमान को भी अपनी राय भेजी है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अभियान का उद्देश्य किसी विशेष व्यक्ति या समूह को लाभ पहुंचाना नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी संगठन को नई तकनीक के अनुरूप मजबूत बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार डिजिटल सदस्यता प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ेगी, फर्जी सदस्यता पर रोक लगेगी और जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं की सही पहचान हो सकेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे किसी भी भ्रम में न रहें और अभियान को सफल बनाने में सहयोग करें।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस संगठन को मजबूत करने के प्रयास में जुटी है। पार्टी पिछले कुछ वर्षों से राज्य में अपने जनाधार को बढ़ाने की कोशिश कर रही है और डिजिटल सदस्यता अभियान उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि संगठन के भीतर मतभेद लंबे समय तक बने रहते हैं, तो इसका असर चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है। इसलिए पार्टी नेतृत्व के सामने संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखना भी बड़ी चुनौती होगी।
इस बीच कांग्रेस के कई युवा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अभियान का समर्थन किया है। उनका कहना है कि डिजिटल प्रणाली से नए लोगों को पार्टी से जुड़ने का अवसर मिलेगा और संगठन पहले की तुलना में अधिक सक्रिय होगा। वहीं कुछ पुराने कार्यकर्ताओं का मानना है कि तकनीक के साथ-साथ अनुभवी कार्यकर्ताओं की भूमिका को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। इस कारण पार्टी के भीतर इस विषय पर लगातार चर्चा जारी है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि कांग्रेस इस अभियान को सफलतापूर्वक लागू कर पाती है, तो यह मॉडल अन्य राज्यों में भी अपनाया जा सकता है। वहीं यदि संगठन के भीतर असंतोष बढ़ता है, तो नेतृत्व को उसमें सुधार के लिए अतिरिक्त कदम उठाने पड़ सकते हैं। फिलहाल पार्टी नेतृत्व अभियान को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने में जुटा है और लगातार जिला स्तर पर समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
बिहार कांग्रेस का ‘सृजन साथी’ अभियान राज्य की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। एक ओर पार्टी इसे संगठन के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, तो दूसरी ओर संगठन के भीतर उठ रहे सवाल यह संकेत दे रहे हैं कि अभियान की सफलता केवल सदस्यता संख्या पर नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के विश्वास और संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने पर भी निर्भर करेगी। आने वाले दिनों में कांग्रेस नेतृत्व इस विवाद का किस प्रकार समाधान निकालता है, इस पर राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की नजर बनी रहेगी।
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